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धर्मांतरण विधेयक वाला उतराखंड सातवां राज्य

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हल्द्वानी। संघ, विहिप, बजरंग दल के पदाधिकारियों का दावा है कि शनिवार को पारित उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा कारगर है। इस अधिनियम का प्रारूप तय करने में दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता वैभव कांडपाल की खासी भूमिका रही।
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बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक रंदीप पोखरिया के मुताबिक उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक का प्रारूप 23 अगस्त 2017 को विहिप की ओर से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा गया था। 13 मार्च, 2018 को मंत्रिमंडल ने इस प्रारूप को मंजूरी दी थी। गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान सरकार इस पर विधेयक लेकर आई और शनिवार को यह विधेयक पारित किया गया। अधिवक्ता वैभव के मुताबिक उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम अन्य छह राज्यों की तुलना में सबसे सशक्त अधिनियम है। इस अधिनियम में लव जेहाद के खिलाफ स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम में केवल विवाह के लिए किए जाने वाले धर्मांतरण को भी कानून के दायरे में लाया गया है। पूर्व में उच्च न्यायालय ने भी विवाह के लिए धर्मांतरण के मामले में सरकार को कानून बनाने का निर्देश दिया था। वैभव के मुताबिक इस अधिनियम में अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, नाबालिग के धर्मांतरण के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं। संघ, विहिप, बजरंग दल आदि के पदाधिकारियों का कहना है कि धर्मांतरण के खिलाफ कानून आने से अब प्रदेश में धर्मांतरण के मामलों पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
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अधिनियम का प्रारूप बनाने वाले अधिवक्ता वैभव कांडपाल का दावा
अधिनियम बनाने वाला उत्तराखंड देश का सातवां राज्य
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