हल्द्वानी। हल्द्वानी में बहुप्रतिक्षित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर (आईडीटीआर) के निर्माण का मामला एक बार फिर जमीन हस्तांतरण की जटिल प्रक्रिया के बीच लटक गया है। यह केंद्र गौलापार में वन विभाग की आठ हेक्टेयर जमीन पर बनना था। वन विभाग को इसके बदले बागेश्वर में 16 हेक्टेयर सरकारी जमीन दी जानी थी लेकिन भारत सरकार के नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने बागेश्वर में चिन्हित जमीन को वनीकरण के लिए अयोग्य बताया है।
हल्द्वानी में चार पहिया और दोपहिया वाहन चलाने के प्रशिक्षण के लिए 2010 से गौलापार में आईडीटीआर शुरू करने की कवायद चल रही है। गौलापार में आठ हेक्टेयर वन भूमि के चिन्हिकरण के साथ ही हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी। इसके लिए सरकार से 15 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था। आईडीटीआर की आठ हेक्टेयर जमीन के बदले वन विभाग को वनीकरण के लिए 16 हेक्टेयर सरकारी जमीन देनी थी। इसके लिए बागेश्वर जिले में 16 हेक्टेयर सरकारी जमीन चिन्हित की गई थी। लेकिन देहरादून स्थित भारत सरकार के नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने सर्वे के बाद इस 16 हेक्टयेर जमीन को वनीकरण के अयोग्य बताया है। ऐसे में हल्द्वानी में यह केंद्र खुलने की राह मुश्किल हो गई है। एआरटीओ प्रशासन संदीप वर्मा ने बताया कि बागेश्वर में मिली जमीन के लिए बागेश्वर डीएफओ, तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ और नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने संयुक्त सर्वे किया था।