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काश्तकारों को मालिकाना हक दिलाने की शासन से सिफारिश

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हल्द्वानी। हल्द्वानी, लालकुआं और रामनगर तहसील क्षेत्र में श्रेणी एक ख और वर्ग चार की जमीन पर काबिज काश्तकारों को मालिकाना हक देने के लिए फिर से प्रयास शुरू हो गए हैं। कई काश्तकारों को इस योजना का लाभ ही नहीं मिल सका है। उनके प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सके थे। मालिकाना हक से वंचित काश्तकारों की समस्या को देखते हुए डीएम ने इस संबंध में पूर्व में जारी शासनादेश की अवधि एक साल के लिए बढ़ाने की शासन से सिफारिश की है।
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प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पिछले साल ऐसे काश्तकारों को मालिकाना हक देने के संबंध में शासनादेश जारी किया गया था। श्रेणी एक ख की भूमि पट्टे की वह जमीन होती है जो सरकार की ओर से कृषि कार्य के लिए पट्टे पर आवंटित की जाती है। इसमें पट्टेदार की मृत्यु होने पर राजस्व रिकार्ड में उसके बेटे का नाम तो दर्ज हो सकता है लेकिन पट्टे की कृषि जमीन को बेचा नहीं जा सकता। इसी तरह वर्ग 4 की भूमि के कब्जेदारों में ऐसे लोग आते हैं जो कि किसी सरकारी जमीन पर 30 वर्षों से पूर्व से काबिज हैं। उनका नाम भी वर्ग 4 की जमीन के राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। इस जमीन को भी कब्जेदार बेच नहीं सकते। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जो शासनादेश जारी किया था वह एक वर्ष की अवधि के लिए था। इसकी समय सीमा 28 जुलाई को समाप्त हो गई है।

श्रेणी एक ख और वर्ग 4 की भूमि पर काबिज काश्तकारों के सौ से अधिक प्रकरणों का निस्तारण हुआ लेकिन समय से पैसा न जमा हो पाने के कारण बड़ी संख्या में काश्तकार मालिकाना हक योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए हैं। इन श्रेणियों की जमीन पर काबिज काश्तकारों की मांग पर शासन को मालिकाना हक देने संबंधी शासनादेश की अवधि एक वर्ष और बढ़ाए जाने के लिए पत्र भेजा गया है ताकि इस योजना से वंचित काश्तकारों को भी इसका लाभ मिल सके।
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दीपेंद्र कुमार चौधरी, डीएम
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