सरकारी निजाम में कैसे काम होता और संसाधनों की बर्बादी होती है, उसका उदाहरण डीएम कैंप कार्यालय में सालों से जंक खा रही क्रेन है। इस क्रेन को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क हादसों को रोकने और बचाव अभियान चलाने के लिए दिया था, लेकिन शायद ही किसी ने क्रेन को चलते हुए देखा।
अब इस क्रेन को नीलाम किया जा रहा है। सोमवार को करीब 19 लाख की क्रेन की निलामी आठ लाख में तय की गई । नीलामी में शामिल लोग साढ़े लाख रुपए ही देने को तैयार हुए।
डीएम कैंप कार्यालय में एक क्रेन सालों से खड़ी है। इस क्रेन पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का स्टीकर भी लगा हुआ है। पूछताछ पर बताया जाता रहा है कि केंद्र सरकार हादसों को रोकने के लिए कुछ न कुछ संसाधन देता है, उसी क्रम में सालों पहले क्रेन को दिया गया था।
क्रेन तो मिल गई, लेकिन उसको चलाएगा कौन? किसके अधीन रहेगी? कौन ड्राइवर देगा और कहां रखा जाए? यह सवाल उठे। बाद में क्रेन डीएम कैंप कार्यालय में रख दी गई। इसके बाद डीएम कैंप कार्यालय से यह क्रेन शायद ही कभी निकली हो और किसी बचाव अभियान में शामिल हुई हो।
जबकि इस दौरान कई दुर्घटनाओं में दूसरे माध्यमों क्रेन मंगाई जाती रही। अब इस क्रेन को बेचने की तैयारी है। करीब 19 लाख की क्रेन की कीमत अब आठ लाख तय की गई है। पर इस कीमत में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं है।
नीलामी में शामिल लोग साढ़े लाख ही देने को तैयार हैं। पर इस बर्बादी और संसाधनों का इस्तेमाल न करने वाले सरकारी महकमों की जिम्मेदारी तय होगी? यह बड़ा सवाल है।