हल्द्वानी। मंदिर में पूजा करना ही अध्यात्म नहीं है, वरन प्रसन्न चित्त, स्वस्थ शरीर, विकार रहित जीवन, पवित्र और शुद्ध विचार, कुशल, तीक्ष्ण बुद्धि ही असली अध्यात्म है। यह तभी संभव है जब हम जीवन में उच्च आदर्श स्थापित करते हुए इसका पालन करें। मनुष्य जैसा व्यवहार अपने लिए चाहता है वैसा ही व्यवहार दूसरों के लिए भी करना चाहिए। यही जीने की असली कला है। आर्ट आफ लिविंग जीने की असली कला सिखाता है।
यहां एमबी इंटर कॉलेज में आर्ट आफ लिविंग की ओर से आयोजित विशाल महा सत्संग में प्रवचन करते हुए पहली बार हल्द्वानी पहुंचे अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर प्रसाद ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य जीवन में रस की खोज में रहता है लेकिन असली रस उसके आसपास होते हुए भी वह अपनी नादानी के कारण पहचान नहीं पाता है। कहा कि जिस तरह माता-पिता अटल सत्य हैं उसी तरह प्रभु भी अटल सत्य हैं, लेकिन हम उनका प्रत्यक्षीकरण नहीं होने से भटकाव की स्थिति में रहते हैं। हमारे चारों ओर हवा है उसे महसूस करते हैं लेकिन देख नहीं सकते उसी प्रकार प्रभु भी सर्वत्र विद्यमान हैं, हम उनका आभास कर सकते हैं लेकिन देख नहीं सकते। जीवन में नीरसता का त्याग कर सुखी जीवन जीने के लिए हमें योग को अपनाना होगा। योग, ध्यान, गान जीवन में अपना लें तो कभी भी नीरसता नहीं आएगी। योग और ध्यान से बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। उन्होंने संस्कृत को जीवन के लिए बहु उपयोगी बताया। उन्होंने बेहतर जीवन जीने के लिए हमेशा प्रसन्न रहने पर जोर दिया। श्री श्री को सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। शाम 4:59 बजे जैसे ही श्री श्री मुख्य मंच पर पहुंचे तो जय गुरुदेव के उद्घोष से माहौल गूंज उठा। श्री श्री रविशंकर ने रैंप पर चलकर लोगों को अभिवादन स्वीकार किया। जब श्री श्री ने रैंप पर लगे स्टेंड पोस्ट पर रखीं गुलाब की पंखुड़ियों को लोगों के बीच फेंका तो लोगों की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। गुलाब की पंखुड़ियों को प्रसाद स्वरूप बटोरने की होड़ लग गई। अपने प्रवचन की शुरूआत में श्री श्री ने लोगों को खुशहाल जिंदगी जीने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्म से ही सच्ची खुशी को पाया जा सकता है।
ध्यान, गायन, योग अपनाने से जीवन में नीरसता नहीं आती
श्री श्री रविशंकर ने लोगों को बताई जीवन जीने की कला
आध्यात्मिक गुरु का प्रवचन सुनने हजारों की भीड़ उमड़ी
नैब के बच्चों ने प्रस्तुत की भावपूर्ण सरस्वती वंदना
हल्द्वानी। शाम चार बजे से प्रस्तावित महासत्संग कार्यक्रम की शुरूआत नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड स्कूल (नैैब) के दिव्यांग बच्चों कविता, जाह्नवी, चांदनी, तराना, ज्योति, बीना ने भावपूर्ण सरस्वती वंदना सुनाकर माहौल भक्तिमय कर दिया। नैब की अध्यक्ष सविता लाहौटी और शिक्षिका ज्योति नौला के साथ 90 बच्चे कार्यक्रम में पहुंचे थे। इसके बाद वरिष्ठ नृत्यांगना मीनू अग्रवाल के नेतृत्व में कलाकारों ने कुमाऊंनी नृत्य पेश किया। कार्यक्रम भजन गायक नितिन डाबर ने भगवान गणेश की आरती, हे गुरुदेव भजन समेत कई भजन सुनाकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
यह रहे मौजूद
मेयर डॉ. जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला, कार्यक्रम संयोजक आरएस कालाकोटी, अवनीश राजपा, गोपाल पाल, कमल कपूर, धीरेंद्र कबड्वाल, रमेश पाल, उद्योग भारती, भूषण तिवारी, रवि जोशी, दीपक सुयाल, हिमांशु उपाध्याय, सीडीओ विनीत कुमार, डीएफओ कल्याणी, तहसीलदार पीआर आर्या आदि थे। नैब के बच्चों ने दीप जलाकर शुरुआत की।
प्रज्ञा योग विधि से किया हतप्रभ
प्रज्ञा योग प्रशिक्षित बच्चों ने आंखों में पट्टी बांधकर किताब पढ़ी, कागज पर चित्रकारी की और विभिन्न रंग भरे। उन रंगों की पहचान भी बताई। प्रज्ञा योग से प्रशिक्षित बच्चों का कारनामा देखकर हर कोई चकित हो गया। श्री श्री ने बताया कि प्रज्ञा योग का तीन-तीन घंटे अभ्यास करने से दो दिन में बच्चा इससे सब कुछ सीख जाता है। प्रज्ञा योग तीसरी आंख का काम करता है। यानी आंख नहीं होने पर भी व्यक्ति आसानी से सभी चीजों की पहचान कर सकता है। संचालन प्रदीप उपाध्याय ने किया।
बेरोजगारों को प्रशिक्षित कर भेजेंगे विदेश
हल्द्वानी। श्री श्री ने कहा कि भारत में बेरोजगारी किसी श्राप से कम नहीं है। उन्होंने बेरोजगार युवाओं से आर्ट ऑफ लिविंग के स्थानीय सेंटर पर पंजीकरण कराने को कहा। कहा कि विदेशों में प्रशिक्षित युवाओं की भारी कमी है जबकि भारत में कई युवा बेरोजगार हैं। ऐसे में आर्ट ऑफ लिविंग संस्था ऐसे बेरोजगार युवाओं को तकनीकी रूप से कौशल प्रदान कर जापान और दूसरे देशों में रोजगार मुहैय्या कराने का काम भी करेगी।
और अंतर्ध्यान हो गए श्री श्री...
हल्द्वानी। शाम 4:55 बजे महासत्संग में पहुंचे श्री श्री ने जीवन जीने की कला से लेकर आध्यात्म को जीवन में उतारने के बारे में बताया। दो बार रैंप पर चलकर लोगों के नजदीक भी पहुंचे। शाम करीब 6:20 बजे भजनों के बीच हर कोई श्री श्री के अभिवादन मेेें खोया हुआ था तभी श्री श्री मुख्य मंच पर पहुंचकर तेजी से अपनी गाड़ी में सवार हो गए। ऐसे में आध्यात्म के रंग में डूबे श्रद्धालु श्री श्री के अचानक चले जाने से हैरान रह गए। लोग कहते सुने गए कि श्री श्री तो पलक झपकते ही अंतर्ध्यान हो गए। हालांकि श्री श्री के कार्यक्रम स्थल से जाने के बाद भी लोग काफी देर तक भजन गायक नितिन डाबर के गाए भजनों पर झूमते रहे।