फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीएचडी थीसिस में साहित्य चोरी रोकने में मददगार होगा उरकुंड

विज्ञापन
डेमो - फोटो : डेमो
विज्ञापन
नैनीताल। पीएचडी थीसिस में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने एंटी प्लगिरिसम सॉफ्टवेयर ‘उरकुंड’ को प्रभावी कर दिया है। इस सॉफ्टवेयर के जरिये शोधग्रंथ में साहित्य की चोरी पकड़ने में आसानी होगी। साहित्य चोरी के प्रतिशत का भी पता लग जाएगा। शोधार्थियों को पीएचडी थीसिस जमा करने से पहले थीसिस की जांच उरकुंड के माध्यम से करानी होगी। इसका प्रमाण पत्र को थीसिस के साथ जमा करना होगा।
विज्ञापन

उरकुंड में जैसे ही किसी शोधग्रंथ को जांच के लिए अपलोड किया जाता है तो वह अपने पास उपलब्ध पूर्व में हो चुके शोध, साहित्यों के संग्रह से उसका मिलान करता है। शोधग्रंथ के शीर्षक, अन्य सामग्रियों का पूर्व में हुए शोधों से हो रहे मिलान और संदर्भित नहीं किए गए कथनों के विषय में बताता है। उसे साहित्य की चोरी मान कर उसके प्रतिशत को बता देता है।


अब चोरी कर थीसिस बनाई तो पकड़े जाएंगे
कुमाऊं विश्वविद्यालय ने लागू किया सॉफ्टवेयर ‘उरकुंड’

20 फीसदी तक अवर्णित सामग्री का हो सकता है प्रयोग
कुमाऊं विवि शोधार्थियों को थोड़ी राहत देते हुए शोधग्रंथ में कम से कम 20 फीसदी तक अवर्णित सामग्री के प्रयोग की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। विवि के वरिष्ठ सूचना वैज्ञानिक डॉ. युगल जोशी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में शोधार्थियों की ओर से कई सामग्री वेबसाइटों से भी ली जाती है। वेबसाइट से मिली जानकारियों के साथ संबंधित वेबसाइट के लिंक का विवरण देने पर प्रयोग की गई सामग्री मान्य होती है।
विज्ञापन


क्या है उरकुंड
स्वीडन की एक कंपनी ने उरकुंड नाम से एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर बनाया है। उरकुंड पीएचडी थीसिस, किताबों का मिलान कर पूर्व में हुए शोध, लेखन से मिल रही सामग्री की जानकारी देता है। उसमें सुधार का मौका भी देता है, जिससे कॉपीराइट की संभावनाएं कम हो जाती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शोध के नए नियमों में इसे प्रभावी कर दिया है।

यूजीसी की ओर से मिले सख्त निर्देशों का पालन करते हुए उरकुंड को प्रभावी किया जा रहा है। कई बड़े विश्वविद्यालयों ने थीसिस को इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जांचना शुरू कर दिया है।
-प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलपति कुमाऊं विवि।

पीएचडी थीसिस की जांच उरकुंड के माध्यम से की जाएगी और उसी के बाद ही थीसिस के मूल्यांकन की कार्रवाई की जाएगी। शोधार्थी को थीसिस के साथ उरकुंड से मिला प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा।
विज्ञापन

- प्रो. राजीव उपाध्याय, निदेशक शोध कुमाऊं विवि।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें