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बिना जरूरत के खरीद लिए मैन्युअल मैक्निकल वेंटीलेटर

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हल्द्वानी। जनता के पैसो की बर्बादी देखनी हो तो सरकारी अस्पतालों में जाकर देखिए। एसटीएच में सात मैन्युअल मेकेनिकल वेंटिलेटर खरीद लिए गए और प्रयोग कुछ भी नहीं हुआ।
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एसटीएच में तीन वर्ष पहले सात मैन्युअल मेकेनिकल वेंटिलेटर खरीदे गए थे। एक वेंटिलेटर की कीमत सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये थी। सीधे तौर पर दस लाख रुपये मशीन खरीद में व्यय किए गए और इसका प्रयोग नहीं किया गया। खास बात यह रही है कि वर्ष 2014-15 में खरीदी गई मशीन का प्रयोग करने से उसी व्यक्ति ने मना कर दिया, जिसने मशीन की खरीद कराई थी। सवाल यह उठता है कि मशीन का जब प्रयोग ही नहीं होना था तो मशीन खरीदी क्यों गई।

डायलिसिस मशीन का नहीं हुआ प्रयोग
हल्द्वानी। अल्मोड़ा समेत राज्य के कुछ अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए डायलिसिस मशीन खरीदी गई थी। छह मशीन की खरीद पर लाखों रुपये खर्च किए गए मगर अल्मोड़ा में वर्ष 2006 से मशीन जंक खा रही है। सूत्रों की मानें तो देहरादून, गोचर के लिए भी मशीन की खरीद हुई थी लेकिन प्रयोग नहीं हुआ। पिथौरागढ़ में लीथोट्रिप्सी मशीन तीन करोड़ रुपये से वर्ष 2010-11 में खरीदी गई लेकिन शुरू 2015 में हुई। करीब तीन करोड़ की मशीन चार से पांच वर्षों तक बंद रही।
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एसटीएच में मेमोग्राफी मशीन खराब
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में मेमोग्राफी मशीन खराब हो गई है। मेमोग्राफी के लिए प्रतिदिन चार से पांच रोगी आते हैं। मेमोग्राफी का प्रयोग पहले ही अस्पताल में कम किया जा रहा था और तीन दिनों से मशीन खराब होने के कारण अब मरीजों को निजी सेंटरों पर जाकर मेमोग्राफी करानी पड़ रही है। दूसरी ओर दो करोड़ की फ्लोरोस्कोपी मशीन का प्रयोग भी नहीं हो रहा है। फ्लोरोस्कोपी मशीन का शीशा टूटा है। लेड लाइन ग्लास नहीं लगाया गया है। मशीन का प्रयोग आंतों की जांचों के लिए किया जाता है।

एसटीएच की लीथोट्रिप्सी मशीन हुई ठीक
हल्द्वानी। किडनी की पत्थरी तोड़ने में काम आने वाली लीथोट्रिप्सी मशीन छह माह ठीक हो गई है। लाखों रुपये की मशीन पिछले छह माह से खराब थी। मशीन खराब होने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल या निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में जाना पड़ रहा था।


मैन्युअल मेकेनिकल वेंटिलेटर और डायलिसिस मशीन की खरीद की जानकारी नहीं हैं। यह सभी पुराने मामले हैं। स्टोर से पता किया जाएगा कि मशीन कब खरीदी गई थी और इसका प्रयोग क्यों नहीं हुआ। पिथौरागढ़ की लीथोट्रिप्सी मशीन का प्रयोग देर में क्यों शुरू हुआ। जरूरत पड़ी तो मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. टीसी पंत
स्वास्थ्य महानिदेशक

मैन्युअल मेकेनिकल वेंटिलेटर के बारे में जानकारी नहीं है। अगर वेंटिलेटर प्रयोग में नहीं आ रहे हैं तो मामला गंभीर है। पूर्व प्राचार्य और पूर्व चिकित्सा शिक्षा निदेशक के समय खरीद हुई हो गई। पूरे प्रकरण की जानकारी की जाएगी।
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- डॉ. आशुतोष सयाना
निदेशक, चिकित्सा शिक्षा
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