हल्द्वानी। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने हिमालय स्टोन क्रशर और हिमालय ग्रिटस को 30 नवंबर तक आबादी से हटाने की मोहलत दी है। दोनों के स्वामियों को एक सप्ताह में क्रशर हटाने का शपथ पत्र भी देना होगा। इस अवधि तक उद्योग नहीं हटाया जाता है तो प्रशासन जबरन हटा देगा।
उमराव सिंह भंडारी और तजिंदर सिंह जौली निवासी फत्ता बंगर मोती नगर ने 11 फरवरी 2017 को एनजीटी में याचिका दायर कर कहा था कि गांव में हिमालय स्टोन क्रशर और हिमालय ग्रिटस होने से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है।
एनजीटी के आदेश पर सितंबर 2017 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने स्टोन क्रशर में प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम, आसपास इलाके में प्रदूषण की जांच की थी। यहां मानकों से अधिक प्रदूषण निकला था। बाद में एनजीटी के आदेश पर ही टीम ने जनवरी 2018 में लालकुआं हल्द्वानी के सभी 27 स्टोन क्रशरों के आसपास प्रदूषण की जांच की थी। इसके बाद टीम ने फरवरी में रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें हल्द्वानी से लालकुआं तक मानकों से अधिक प्रदूषण होने की पुष्टि हुई थी। बीते चार मार्च को एनजीटी में याचिका पर सुनवाई हुई थी।
इधर तीन अप्रैल को एनजीटी ने याचिका पर सुनवाई के बाद हिमालय स्टोन क्रशर, हिमालय ग्रिटस को 30 नवंबर तक उद्योग शिफ्ट करने की मोहलत दी है। साथ ही एक हफ्ते में उद्योग शिफ्ट करने के शपथ पत्र देने के आदेश दिए हैं। आदेश में यह भी कहा कि यदि क्रशर, ग्रिटस नहीं हटाया तो प्रशासन पुलिस की मदद से जबरन हटा ले।
हवा, मिट्टी, पानी, ध्वनि प्रदूषण के नमूने फेल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि क्रशर के आसपास हवा, पानी, ध्वनि, मिट्टी में मानकों से अधिक प्रदूषण था। रिपोर्ट में यह भी लिखा था कि रेड वर्ग का उद्योग आबादी के बीच में है।
एनजीटी ने हिमालय स्टोन क्रशर और हिमालय ग्रिटस को हटाने के लिए 30 नवंबर तक मोहलत दी है। एक हफ्ते में इनके स्वामियों को हटाने का शपथ पत्र देना होगा। यदि फिर भी नहीं हटाया तो प्रशासन जबरन हटा सकता है।
- दुष्यंत मैनाली, अधिवक्ता
क्या कहते हैं क्रशर स्वामी
एनजीटी के आदेशों का पालन किया जाएगा। राज्य की नीति के अनुसार ही क्रशर का संचालन किया जाएगा।
- भूमेश अग्रवाल, स्वामी हिमालय स्टोन क्रशर