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बेटियों ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना नहीं थी

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हल्द्वानी।बेटों को दीपक तो बेटियों को बाती यूं ही नहीं कहा जाता। मौका मिले तो बेटियां अपने प्रकाश से परिवार ही नहीं प्रदेश और देश को भी आलोकित कर सकती हैं। रामनगर के पीरूरमदारा निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार खीमानंद पंचोली की तीन बेटियां उनके परिवार का संबल बनी हैं। माता-पिता ने कभी उन्हें लड़कों से कमतर नहीं आंका। हीन भावना नहीं पाली। भेदभाव नहीं किया। आज बड़ी बेटी टीसीएस कंपनी में सॉफ्टवेयर वेब इंजीनियर है तो दो छोटी बेटियां लेफ्टिनेंट।
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पौड़ी जिले के रहने वाले खीमानंद पंचोली जब सेना में थे तब तीनों बेटियां उन्हें सीमा पर तैनात सैनिकों की बहादुरी की कहानियां सुनाने को कहती थीं। तभी से तीनों ने वर्दी पहनकर देश सेवा का संकल्प ले लिया। तड़क भड़क भरी जिंदगी से दूर रहकर पढ़ाई में रमीं और मुकाम पाने का सपना देखने लगीं। बड़ी बेटी प्रिया इस समय इंजीनियर है।
उनसे छोटी पूजा ने साढ़े चार साल की बीएससी (नर्सिंग) की डिग्री आर्मी कॉलेज ऑफ नर्सिंग जालंधर से पूरी की। सवा साल हेंटेज नर्सिंग कॉलेज वाराणसी में कार्यरत रहीं। उसके बाद सवा साल पीजीआई सैफई इटावा में नर्सिंग ऑफिसर रहीं। लेकिन वर्दी पहनने के जुनून ने उन्हें सिविल सेवा छोड़ने को मजबूर कर दिया। फरवरी 2017 में मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में लेफ्टिनेंट के रूप में नार्थ-ईस्ट सेक्टर में तैनाती मिल गई। बड़ी बहन से प्रेरणा लेकर छोटी बहन प्रियंका ने केंद्रीय विद्यालय से 12वीं करने के बाद ही आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) से मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) सीधे ज्वाइन कर लिया। वह हारमोनियम में संगीत विशारद भी हैं।
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खीमानंद पंचोली कहते हैं कि बेटियां तो ईश्वर की सबसे बड़ी देन हैं। धरती पर मानव जीवनधारा का एकमात्र स्रोत भी। हर किसी को बेटियों के प्रति गहरी संवेदना होनी चाहिए।
प्रेरणा स्रोत
पूजा और प्रियंका के अनुसार पिताजी की वर्दी और कार्य के प्रति उनके समर्पण ने हमेशा प्रेरित किया। उनके चेहरे पर कभी थकान या चिंता का भाव नहीं देखा। मदर टेरेसा ने भी प्रभावित किया। अगर वह हमारे देश के लिए अपना जीवन लगा सकती हैं तो हम क्यों नहीं अपने देश की सेवा के लिए तत्पर रहें। सेवा का जरिया कुछ भी हो सकता है।
चुनौतियों को स्वीकार किया
जिम्मेदारी चुनौतीपूर्ण है खासकर किसी का जीवन बचाना। यह चुनौती उस समय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है जब देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाला आपके सामने हो। यदि आपका जज्बा सेवा का है तो मुश्किलें स्वत: ही आसान होती जाती हैं।
बेटियों के लिए संदेश
जब बेटियां पढ़ेंगी, आगे बढ़ेंगी तो देश आगे बढ़ेगा। समाज की कुरीतियां दूर होंगी। लड़कियों को बचपन से ही लक्ष्य तय कर लेना चाहिए। सोते, जागते, खाते-पीते, उठते-बैठते जेहन में बस उसी लक्ष्य का स्मरण होना चाहिए। हां, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जमाना प्रतिस्पर्द्धा का है। दूसरा भी ऐसा ही कर रहा होगा।
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