हल्द्वानी। महिला अस्पताल में वर्षों से कछुआ गति से चल रहा निर्माण आखिरकार पूरा होने को है। दूसरे गेट का निर्माण शुरू हो गया है और इस माह स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण के बाद भवन हस्तांतरित किया जा सकता है।
महिला अस्पताल में अभी तक 30 बेड हैं। सौ बेड के लिए नए भवन का निर्माण वर्ष 2009 में शुरू हुआ था। 03 करोड़ 54 लाख 95 हजार रुपये की लागत से भवन का निर्माण 2012 में पूरा होना था। शासन से धनराशि समय पर न मिलने के कारण निर्माण कार्य लटका रहा। वर्ष 2014 में निर्माण कार्य की लागत बढ़कर 06 करोड़ 70 लाख 13 हजार रुपये हो गई। निर्माण कार्य अब पूरा होने की स्थिति में है। महिला अस्पताल में एंबुलेंस के सीधे दूसरी बिल्डिंग तक जाने के लिए नए गेट का निर्माण शुरू हो गया है। पेयजल निर्माण निगम की परियोजना प्रबंधक मृदुला सिंह ने बताया कि गेट की सजावट के अलावा कुछ छोटे काम शेष रह गए हैं। शेष बचे कामों को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कहा कि 15 लाख रुपये की धनराशि का शासनादेश हो गया है मगर अभी धनराशि नहीं मिली है। स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण के बाद भवन उनको हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
सवाल ये उठता है कि महिला अस्पताल में कुल 31 कर्मियों का स्टाफ है। सौ बेड शुरू होने के बाद अस्पताल 130 बेड का हो जाएगा। महिला अस्पताल में स्टाफ की तैनाती को लेकर 16 मई 2016 को स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया था, जिसमें लगभग डाक्टरों समेत 80 से अधिक स्टाफ की आवश्यकता जताई गई थी। वर्ष 2016-17 के लिए नई नियुक्ति होने पर एक वर्ष का वेतन एवं अन्य भत्तों में अनुमानित व्यय लगभग 04 करोड़, 85 लाख रुपये बताया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से 25 मई 2017 को दोबारा पत्र भेजा गया मगर अभी तक स्टाफ की नियुक्ति के संबंध में निर्णय नहीं हो पाया है।
2012 में तैयार होना था सौ बेड का अस्पताल, इस माह स्वास्थ्य विभाग को सौंपने की तैयारी
बिना डाक्टर एवं अन्य स्टाफ के कैसे चलेगा 130 बेड का अस्पताल
ट्रेनिंग समेत अन्य काम भी निपटाने पड़ते हैं
हल्द्वानी। अस्पताल की जिम्मेदारी के अलावा डाक्टरों को अन्य जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना पड़ता है। परिवार नियोजन शिविर, नारी निकेतन और जेल में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जाने के साथ ही मेडिको लीगल मामले भी देखने होते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग केे विभिन्न कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलते रहते हैं।
कम हो गई ऑपरेशन की संख्या
हल्द्वानी। महिला अस्पताल में एनस्थेटिस्ट के पद पर कार्यरत डाक्टर अपने पिता का स्वास्थ्य खराब होने के कारण अवकाश पर हैं। बेस अस्पताल से एनस्थेटिस्ट खाली होने पर एनस्थीसिया देते हैं, जिसके चलते आपरेशन से होने वाले प्रसव के मामले कम हुए हैं। सीएमएस डॉ. भागीरथी जोशी ने बताया कि शुक्रवार को आपरेशन से महज दो प्रसव हुए।
शासन को पद स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। डीपीआर बनने के साथ ही पदों के बारे में संबंधित अस्पताल से ब्योरा मांग लिया जाता है। सीएमएस को भी दोबारा पत्राचार करना पड़ेगा कि पद स्वीकृति के लिए भेजे गए प्रस्ताव की स्थिति क्या है। - डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, प्रभारी, स्वास्थ्य महानिदेशक