हल्द्वानी। आतंकियों को धूल चटाने वाले कीर्ति चक्र विजेता मेजर विजयंत सिंह बिष्ट का बचपन भी संघर्षों से बीता है। इसके बाद भी उन्होंने अपने भाई के साथ आगे बढ़ने का जज्बा दिखाया और पढ़ लिखकर सेना में ऑफिसर बन गए।
विजयंत सिंह बिष्ट की ममेरी बहन पूनम रौतेला यहां दुर्गा कालोनी नवाबी रोड में रहती हैं। उन्होंने बताया कि विजयंत सिंह बिष्ट का पैतृक घर अल्मोड़ा जिले के डोल गांव में हैं। उनके पिता खीम सिंह बिष्ट आईटीडीसी दिल्ली में तैनात थे। विजयंत के मामा आर एस रौतेला एटा में नौकरी कर रहे थे। वहीं मेजर का जन्म हुआ। मेजर के बड़े भाई लेफ्टिनेंट अविनाश सिंह बिष्ट फिरोजपुर (पंजाब) में तैनात हैं। मेजर विजयंत जब पांच साल के थे, तभी पिता की मौत हो गई। पिता के स्थान पर मां हरिप्रिया बिष्ट को आईटीडीसी में नौकरी मिल गई। पिता का साया सिर से उठने के बावजूद दोनों भाइयों ने काफी संघर्ष के साथ दिल्ली में पढ़ाई की। खेलकूद और पढ़ाई में अव्वल दोनों भाइयों का सेना में चयन हो गया। मामा के अलावा उनके बेटों आशीष रौतेला और ममेरी बहन ने काफी सहयोग किया। यहीं कारण है कि मेजर ने अपना मूल पता शांति निवास दुर्गा कालोनी विभाग दर्ज कराया है। ममेरी बहन का कहना था कि फोन आया था कि विजयंत ने उड़ी सेक्टर में दो आतंकियों को ढेर कर दिया है और अपनी फौज को बचाने में अहम भूमिका निभाई है तो गर्व से सीना तन गया। वर्तमान में विजयंत की तैनाती हैदराबाद में है। उनकी मां बड़े भाई के साथ फिरोजपुर (पंजाब) में रहती है। मेजर ने छुट्टी मिलने पर जल्द हल्द्वानी आने का वादा किया है।
बेटे ने उत्तराखंड का नाम किया रोशन
मेजर विजयंत की मां हरिप्रिया बिष्ट ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि बेटे ने देश के साथ उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उनके दोनों बेटे बहादुर और देश के सच्चे सिपाही हैं। बेटों ने पिता के सपनों को पूरा किया है। देश के हर बच्चे को नौकरी के साथ समाज के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।