हल्द्वानी। जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों को कमिश्नर के आदेश की भी चिंता नहीं है। सूखे जैसी स्थिति का हाल जानने के लिए कमिश्नर ने सर्वे का निर्देश दिया था। सर्वे सोमवार से होना था लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें अब तक दफ्तरों से नहीं निकल पाई हैं। लंबे समय से बरसात न होने के कारण जिले के काश्तकार सूखे की स्थिति से जूझ रहे हैं। पर्वतीय ब्लाकों में खेतीबाड़ी पर सूखे का खासा असर पड़ रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश भूमि असिंचित होने के कारण खेतीबाड़ी का पूरा दारोमदार बरसात पर ही निर्भर रहता है लेकिन जिले में बीते पांच माह से बरसात नहीं हुई है। ऐसे में समूचा क्षेत्र सूखे की स्थिति से जूझ रहा है। सूखे के कारण काश्तकार आलू व अन्य फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार नहीं कर पा रहे हैं। जिन काश्तकारों ने आलू और मटर आदि की बुवाई की भी है तो उनके खेतों में बीज अंकुरित नहीं हुए हैं। फलों के बगीचों पर भी सूखे का खासा असर पड़ा है। सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने हफ्ता भर पहले जिलाधिकारियों को सूखे से हुए नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे लेकिन जिले में अभी भी सूखे से हुए नुकसान का सर्वे शुरू नहीं हुआ है। किसान संगठन के प्रदीप बिष्ट ने जिला प्रशासन से सूखे से हो रहे नुकसान का जल्द सर्वे कराकर प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा दिलाने की मांग की है।
जिले में कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सूखे से हुए नुकसान का सर्वे करना है। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर टीमें गठित की जा रही हैं। जल्द सर्वे शुरू कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। -धनपत कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी नैनीताल