हल्द्वानी। नगर निगम का कूड़ा निस्तारण न होने से गौला बाइपास में आरक्षित वन क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ जंगल को निगलने लगे हैं। अब नगर निगम की सीमा विस्तार के बाद यह कूड़ा और बढ़ेगा। विभागों की लेटलतीफी के कारण नगर निगम को वन विभाग से चार हेक्टेयर जमीन नहीं मिल सकी है जबकि नगर निगम ने दो हेक्टेयर में कूड़ा डालने के मौखिक आदेश के बाद पांच हेक्टेयर में कूड़ा डाल दिया है। इससे लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
नगर निगम 2012 में गौला नदी के किनारे कूड़ा फेंकता था। इसे नदी प्रदूषित हो रही थी। हाइकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल होने के बाद यहां कूड़ा डालने में रोक लगा दी गई। इससे नगर निगम का कूड़ा एक सप्ताह तक नहीं उठ सका। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में वन विभाग, नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई। वन विभाग ने गौला आरक्षित वन क्षेत्र के पास दो हेक्टेयर वन क्षेत्र में कूड़ा डालने की मौखिक सहमति दी।
मौखिक सहमति के बाद नगर निगम ने अपना कूड़ा यहां डालना शुरू किया। धीरे-धीरे यह अस्थायी ट्रंचिंग ग्राउंड बन गया। 2017 आने तक यह कूड़ा करीब पांच हेक्टेयर में फैल गया। अब नैनीताल का भी कूड़ा आने से यहां कूड़े के पहाड़ बनते जा रहे हैं। चार साल से ठोस कूड़ा प्रबंधन की चार हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव वन विभाग के पाले में घूम रहा है। ईआईए की अनुमति मिलने के बाद अब यह फाइल शिवालिक एलीफेंट रिजर्व से एनओसी के लिए लंबित है। इस कारण नगर निगम को चार हेक्टेयर जमीन नहीं मिल सकी है।
कब क्या हुआ
2012-13 : नगर निगम को जंगल में कूड़ा डालने के लिए दो हेक्टेयर जमीन में वन विभाग ने मौखिक रूप से सहमति दी थी
2013-14 : नगर निगम ने ठोस कूड़ा प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) के तहत चार हेक्टेयर जमीन के लिए प्रस्ताव भेजा था।
2015 : वन विभाग की ओर से सैद्धांतिक सहमति मिली
2016 : नगर निगम ने इस जमीन के एवज में वन विभाग को 42 लाख रुपये के साथ ही पौड़ी में आठ हेक्टेयर जमीन दी
सितंबर 2017 : पर्यावरणीय असर के आकलन की स्वीकृति मिली