ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर क्षतिग्रस्त वीरभट्टी पुल के विकल्प रूप में बन रहे घाटी पुल के निर्धारित 20 नवंबर से शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे है। अभी आधे पुल के ही पैनल ही लग पाए थे कि सोमवार को पुल के दूसरे छोर पर मलबा आने से काम में व्यवधान आ गया। हालांकि एनएच के अधिकारी निर्धारित समय पर कार्य पूरा होने के दावे कर रहे हैं।
25 सितंबर के गैस वाहन हादसे के बाद ब्रिटिशकालीन वीरभट्टी पुल 26 अक्तूबर को एनएच के अधिकारियों की अदूरदर्शिता और लापरवाही से पूरी तरह से टूट गया था। अब विकल्प के रूप में घाटी पुल (वैली ब्रिज) का निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। विभाग ने 20 नवंबर तक यातायात सुचारु करने का दावा किया था। लेकिन लगता नहीं है कि उक्त मोटर मार्ग को निर्धारित तिथि तक एनएच सुचारु कर पाएगा। पिछले 15 दिनों में विभाग पुल के दोनों छोर पर प्लेटफार्म का निर्माण कर पुल के आठ पैनल को जोड़ पाया है जबकि कुल 16 पैनल लगाए जाने हैं, उसके बाद पैनल के ऊपर प्लेट बिछाने, दोनों छोर पर मोटर मार्ग का निर्माण और अन्य कार्य अभी शेष हैं। पुल के दूसरे छोर पर बलियानाला की पहाड़ी से रविवार देर रात और सोमवार सुबह रुक रुक कर भूस्खलन हुआ, जिससे काम में व्यवधान हुआ। विभाग पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने का कार्य करा रहा है। एनएच के ईई महेंद्र कुमार और एई केएस मेहता ने बताया कि मलबा आने से पुल के प्लेटफार्म को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। पूरी कोशिश है कि 20 नवंबर से यातायात सुचारु कर दिया जाए।
बलियानाले में फेंक रहे मलबा
पुल निर्माण के दौरान प्लेटफार्म बनाने, बलियानाला की पहाड़ी कटान से निकले मलबे को बलियानाला में फेंका जा रहा है। इससे पर्यावरण को क्षति के साथ-साथ बलियानाला से लगे इलाकों को खतरा हो सकता है। सिंचाई विभाग द्वारा नाले में कराए जा रहे 40 करोड़ रुपये के कार्यों के बर्बाद होने की आशंका है। भाजपा मंडल अध्यक्ष पुष्कर जोशी ने बलियानाला में फेंके जा रहे मलबे को पर्यावरण और आसपास के गांवों के लिए खतरा बताते इसका निस्तारण अन्यत्र करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभाग की इस लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा।
अवैज्ञानिक तरीके से हो रहा पुल का निर्माण : भट्ट
नगर पालिका परिषद के सभासद डीएन भट्ट ने वीरभट्टी पुल के समीप घाटी पुल का निर्माण अवैज्ञानिक तरीके से किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर पुल का निर्माण हो रहा है वह काफी कच्चा है। भट्ट ने कहा कि पूर्व में भी जिला प्रशासन को इस बात की जानकारी दे दी गई थी लेकिन उसे इसे गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन को चाहिए कि वह इस कच्ची पहाड़ी पर पुल का निर्माण वैज्ञानिकों की राय लेकर ही करें। ब्यूरो
मजदूरों से बिना सुरक्षा के कराया जा रहा काम
निर्माणाधीन घाटी पुल में कार्यरत दर्जनभर श्रमिकों की जिन्दगी से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। हवा में लटके और अधबने पुल जिसके नीचे 100 फिट गहरी खाई है। साथ ही बलियानाले में बड़े-बड़े बोल्डर और पत्थर पड़े हुए हैं। ऐसे खतरनाक स्थल में बिना सुरक्षा उपायों के कार्य कराया जा रहा है। सुरक्षा उपायों की अनदेखी कभी भी किसी श्रमिक की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। श्रम विभाग के अधिकारियों को भी इससे कोई लेना देना नहीं है। लगता है इस बार भी हादसे के बाद इस ओर ध्यान दिया जाएगा?
क्या होने चाहिए सुरक्षा मानक
कार्य में लगे मजदूरों को सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट दिए जाने चाहिए।
पुल निर्माण स्थल के नीचे मजबूत फेब्रिक का जाल लगा होना चाहिए