हल्द्वानी। निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग की सख्ती का असर देखने को मिला है। जिन निजी स्कूलों को पूर्व में शिक्षा विभाग ने नोटिस दिया थे, उनमें 18 स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की किताब लगाने से इनकार कर दिया है। ऐसे में छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ हल्का होगा साथ ही अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। हालांकि कई अभिभावक स्कूल प्रबंधन के निर्देश पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीद चुके हैं।
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाने से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसके बाद शिक्षा विभाग देर से ही सही, मगर हरकत में आया। शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों का निरीक्षण करते हुए अनियमितता पाए जाने पर 53 स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भेजा था। इस पर 18 स्कूलों ने जवाब दाखिल कर दिये हैं। कुछ स्कूलों ने तर्क दिया है कि कंप्यूटर, ग्रामर और वर्कबुक की पुस्तकें अतिरिक्त लगाई गई हैं, क्योंकि ये बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए जरूरी हैं और एनसीईआरटी में ये किताबें उपलब्ध नहीं हैं। जवाब दाखिल करने वाले स्कूलों ने नियमों का पालन करते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने से मना कर दिया है।
खंड शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने बताया कि 18 स्कूलों ने अपने जवाब दाखिल कर दिये हैं और एनसीईआरटी के अतिरिक्त किताबें लगाने से मना कर दिया है। बाकी विद्यालयों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। भविष्य में भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं तो उचित कार्रवाई की जाएगी।