चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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भवाली (नैनीताल)। उत्तराखंड न्यायिक अकादमी (उजाला) में न्यायिक सुधार पर कार्यशाला (नार्थ जोन रीजनल कांफ्रेंस) हुई, इसमें उत्तर क्षेत्र के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों ने न्यायिक सुुधार पर जोर देते हुए कहा कि न्यायालयों में त्वरित कार्रवाई पर बल दिया जाना चाहिए।
कार्यशाला का शुभारंभ राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक जी रघुराजन एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने किया। कार्यशाला में पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के उच्च न्यायालयों के 140 न्यायाधीशों ने हिस्सा लिया। न्यायिक अकादमी भवाली (उजाला) के निदेशक प्रशांत जोशी ने बताया कि कार्यशाला में न्यायाधीशों का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया में सुधार के साथ ही यह भी सुनिश्चित हो कि आम आदमी को त्वरित न्याय मिले, इसके लिए सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए सभी न्यायालय और न्यायाधीश अपने स्तर पर इस दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। कहा गया कि न्यायिक प्रक्रियाओं में अगर देरी हो रही है तो इसमें सुधार के लिए सभी सुनिश्चित कदम उठाने की पूरी कोशिश की जा रही है। कार्यशाला को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाष धूलिया, न्यायमूर्ति आलोक सिंह समेत अन्य न्यायाधीशों ने संबोधित किया।
त्वरित न्यायिक कार्रवाई पर जोर दिया
उत्तराखंड न्यायिक अकादमी में न्यायिक सुधार पर कार्यशाला