हल्द्वानी। वन विकास निगम में एक बड़ा घपला सामने आया है। सेना के नाम पर आवंटित वाहनों के पंजीयन का भी लाखों में सौदा कर दिया गया। हर साल इन पंजीयन को बेचकर लाखों की कमाई की जाती है।
वन विकास निगम गौला नदी से उप खनिज की निकासी के लिए वाहनों को एक पंजीयन संख्या आवंटित करता है। इस संख्या के होने पर ही नदी से उप खनिज निकासी होती है। इधर साल 2006 में कुमाऊं रेंजीमेंट के रानीखेत में एक हॉस्टल बनना था। इस पर कुमाऊं रेजीमेंट की कमोला धमोला सेंटर के मेजर ने आरबीएम के लिए वन, वन निगम से पंजीयन की मांग की थी। जांच के बाद वन, वन निगम ने चार ट्रकों के लिए पंजीयन संख्या 4450, 4451, 4452, 4453 आवंटित की थी। इसकी पुष्टि तल्ली हल्द्वानी निवासी राजेंद्र सिंह बिष्ट के सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी में हुई है। रानीखेत में हॉस्टल बनने के बाद सेना ने इनका इस्तेमाल नहीं किया। जब कई सालों तक पंजीयन का इस्तेमाल नहीं हुआ तो वन निगम कर्मियों ने एक खेल किया। सूत्रों की मानें तो करीब आठ साल बाद 2013-14 में निगम कर्मियों ने मिलीभगत कर इन पंजीयन की आड़ में डंपर चालकों से सौदा किया। हर साल कुछ कर्मचारी इनका लाखों रुपये में सौदा करते हैं। अभी भी ये पंजीयन नदी में चल रहे हैं।
सेना के नाम पर आवंटित वाहन पंजीयन का भी कर दिया सौदा
2006 में सेना को गौला से उपखनिज निकासी को मिले थे चार पंजीयन
हर साल 2-3 लाख रुपये में एक-एक पंजीयन का सौदा
वर्तमान में बेरीपड़ाव में चल रहे हैं ये पंजीयन
वन निगम से मिली जानकारी के मुताबिक अभी चारों पंजीयन लालकुआं सब डिविजन के बेरीपड़ाव गेट पर चल रहे हैं। दो पंजीयन एक ही व्यक्ति के हैं, बाकी दो अलग-अलग व्यक्तियों के पास आवंटित हैं।
दो-तीन लाख में बिकता है एक पंजीयन
गौला नदी में उप खनिज निकासी के लिए वाहन का एक पंजीयन दो-तीन लाख रुपये में बिकता है। चार पंजीयन से निगम कर्मी हर साल 8-10 लाख की काली कमाई करते हैं।
शिकायत मिली है, अब होगी जांच
मुझे इसकी शिकायत मिली है, अब इस मामले की जांच की जाएगी। यदि कोई भी कर्मचारी इसमें दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-एमपीएस रावत, क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम