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फिर नहीं मिली एमबीबीएस की मान्यता

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हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पांच वर्ष की मान्यता में फैकल्टी और रेजीडेंट की कमी फिर बाधक बन गई है। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने फिर मान्यता देने से इंकार कर दिया है। एक माह के भीतर फैकल्टी और रेजीडेंट की कमी को दूर करने को कहा है।
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एमबीबीएस की सौ सीटों के लिए 26 फरवरी 2018 को एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया था। निरीक्षण में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों समेत अन्य के प्रपत्रों की जांच के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं देखी थीं। कुछ कमियों का एमसीआई ने निरीक्षण रिपोर्ट में ही उल्लेख कर दिया था। इससे पहले टीम छह जुलाई,18 दिसंबर 2015, 18 मई 2016, आठ मार्च, सात सितंबर 2017 को भी निरीक्षण कर चुकी है।

मेडिकल कॉलेज की स्थिति
- 64 डॉक्टर स्थायी हैं।
- 44 डॉक्टर संविदा पर हैं।
- 22 से अधिक डॉक्टरों की जरूरत।
- छह डाक्टरों की रेडियोलॉजी विभाग में जरूरत
- 2010 से अब तक स्थायी नियुक्तियां नहीं हुई हैं।
- 2015 से 10 बार विज्ञप्ति निकाली गईं मगर नहीं मिले डॉक्टर।

इन विभागों में है कमी
बायोकैमिस्ट्री में एक प्रोफेसर, सोशल एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन में एक प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर, फारेंसिक मेडिसिन में पांच असिस्टेंट प्रोफेसर, जनरल सर्जरी में दो असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडियोलॉजी में एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर। क्लीनिक्ल विभाग में एसआर की कमी 16 प्रतिशत है। मेडिसिन में चार, सर्जरी में चार, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में चार सीनियर रेजीडेंट कम हैं।
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151 पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति जल्द होने जा रही है। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पर भी नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर बात चल रही है। एमसीआई की ओर से बताई गई कमियों को जल्द दूर किया जाएगा।
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- डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा-शिक्षा निदेशक
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