हल्द्वानी। केंद्र सरकार 2024 तक टीबी को खत्म करने, टीबी रोगियों की पूर्ण जानकारी देने को लेकर सख्त हो गई है। टीबी रोगियों की जानकारी न देने वाले अस्पतालों, डॉक्टरों के खिलाफ अब कार्रवाई होगी।
टीबी के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद टीबी नियंत्रित नहीं हो सकी है। वर्ष 2016 में 13 हजार 750 टीबी रोगी चिह्नित हुए थे। प्रदेश में सबसे ज्यादा टीबी मरीज हरिद्वार में 4,255 थे। दूसरे नंबर पर देहरादून में 3,820, ऊधमसिंह नगर में 1,894, नैनीताल में 1,666 मरीज थे जबकि 2017 में संख्या बढ़कर 14,807 हो गई थी। फरवरी में घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजने की मुहिम शुरू की गई थी। इस दौरान विभिन्न टीमों के लगभग 33 हजार लोगों से संवाद हुआ था। इसमें 216 लोगों के बलगम की जांच कराई गई थी और 16 में टीबी की पुष्टि हुई थी। 16 में से भी दो मरीज एमडीआर की स्टेज में मिले थे। टीबी मरीजों की जानकारी को लेकर केंद्र सरकार ने आदेश जारी किया है। आदेश में कहा है कि क्षय रोगियों, दवाइयों के ब्योरे के बारे में सूचना देनी होगी। क्षय रोगियों को दवा देने वाली फार्मेसी, केमिस्ट, औषधि विक्रेता समेत डॉक्टर को भी जानकारी देनी होगी। दवा, इलाज की एक प्रति नोडल अधिकारी को देनी होगी। केंद्र सरकार ने सूचना का आदान-प्रदान करने में लापरवाही मिलने पर कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया है। कहा गया है कि अगर ऐसा काम द्वेषपूर्ण ढंग से किया गया होगा तो भी सजा हो सकती है।
दवाओं का ब्योरा देने के साथ ही नुस्खापर्ची की प्रति नोडल अधिकारी को देनी होगी
भारत सरकार ने आदेश जारी कर सूचना न देने वालों के लिए दंड का प्रावधान किया
टीबी रोगियों की सूचना न देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। भारत सरकार टीबी मरीजों को लेकर सीधा संज्ञान ले रही है। सरकार की मंशा है कि मरीज चिह्नित हों और समय पर उनका इलाज हो सके।
- डॉ. वी काला, राज्य क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी