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दर्द बयां करते-करते छलक आए आंसू

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हल्द्वानी। एक ओर केंद्र सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चला रही है तो दूसरी ओर बेटियों पर जुल्म हो रहे हैं। किसी ने दो बेटियां होने पर मां पर तेजाब का हमला कर दिया तो किसी ने दुश्मनी निकालने के लिए तेजाब फेंक दिया। परिजन सीने में दर्द को दफन किए आज भी अपनों का इलाज कराने को जूझ रहे हैं। दर्द बयां करते-करते परिजनों की आंखें छलक आईं।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से एसआईएमएस अस्पताल वाडापलानी, चेन्नई के सहयोग से सेंट्रल हॉस्पिटल में निशुल्क सर्जरी शिविर आयोजित किया गया है। उत्तर भारत के नौ राज्यों से तेजाब पीड़ित सर्जरी कराने के लिए पहुंचे हैं। अमर उजाला ने उनके परिजनों से बात की तो उनका दर्द छलक आया:

कानूनगो, लेखपाल खा गए मुआवजा
मेरी बेटी सितारा बी की दो बेटियां हो गईं तो बहनोई ने उस पर तेजाब फेंक दिया। सितारा बी के साथ छोटी बेटी नाजमा भी सो रही थी। तेजाब नाजमा के ऊपर भी पड़ गया और हाथ एवं पीठ झुलस गई है। दर्जी का काम करके परिवार चला रहे थे और उम्र बढ़ने के साथ आंखों से दिखाई देना भी कम हो गया है। उत्तर प्रदेश में पूछने वाला कोई नहीं है। मुआवजा दिलाने के नाम पर कानूनगो एवं लेखपाल पैसा खा गए मगर मुआवजा नहीं मिला। विधायक से भी गुहार लगाई थी मगर नतीजा सिफर ही रहा। -सय्याज अहमद, बदायूं
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सर्जरी बहुत महंगी
मेरा भाई गाड़ी चलाता था। बैटरे में एसिड डालने के लिए बोतल लाए थे। भाई ने एसिड की बोतल स्लैब के ऊपर रख दी। बहन मीरा स्लैब के नीचे सो रही थी। रात में बिल्ली ने बोतल गिरा दी और एसिड मीरा के ऊपर जाकर गिरा। सरकार की ओर से मुआवजा दिया गया। कहा कि सर्जरी बहुत महंगी है और आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। अमर उजाला फाउंडेशन ने ऐसा शिविर आयोजित कर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की मदद की है। - तारा, बरेली
सरकार से नहीं मिला मुआवजा
मेरी पत्नी सुमायरा हल्द्वानी में रहती है। पड़ोस वालों से झगड़ा हुआ था। उनके ऊपर एसिड फेंका गया तो मेरी पत्नी के ऊपर भी आकर गिर गया। सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में अपने पैसे से इलाज कराया, सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला। कहा कि इस तरह का कैंप दोबारा भी होना चाहिए जिससे तेजाब पीड़ितों की सर्जरी एवं इलाज हो सके। -नजाकत हुसैन, हल्द्वानी

आरोपी जेल से बाहर आ गए
संभल के एक अस्पताल से रिश्तेदार को देखकर लौट रहे थे। बाइक पर बेटी दिव्या आगे बैठी थी। कुछ लोगों से दुश्मनी थी। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले जंगल में अचानक सामने से आकर तेजाब फेंक दिया। मुकदमा दर्ज कराया था अब आरोपी जेल से बाहर आ गए हैं। सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला। पैसा इतना नहीं कि इलाज करा सकें और सारी सुविधाएं दे सकें। कैंप में बहुत सहूलियत मिली है। - कृष्ण दत्त शर्मा, अमरोहा

सरकार ने नहीं सुनीं, कैंप में मिला सहारा
पत्नी रीना पाल बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा देकर आ रही थी कि रास्ते में अज्ञात लोगों ने तेजाब फेंक दिया। प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोपी पकड़ा गया था पर अब छूट गया है। सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से लगे कैंप से सहारा मिला है। -विजय, प्रतापगढ़

पति ने तेजाब फेंका था
मेरे पास मुंबई से फोन आया कि तुम्हारी लड़की इल्मा जल गई है। जान से मारने की धमकी देकर पुलिस के सामने लड़की से बयान दिलवाया कि उसने स्वयं अपने ऊपर तेजाब डाला है। बेटी को गुटखा खाने की आदत है और पति छोड़ने को कह रहा था। इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था और पति ने तेजाब फेंका था। आरोपी जेल से बाहर है। सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला है। कहा कि कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कैंप लगेगा। -प्रवीन, मुरादाबाद

पति चाय की दुकान चलाते हैं
मेरी बेटी मोहिनी गुप्ता अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। तेजाब की बोतल को पानी की बोतल समझकर मुंह से लगा लिया था और झुलस गई। 15 वर्षों तक सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में इलाज कराया। सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला है। पति चाय की दुकान चलाते हैं। चार बेटियों में तीन की शादी हो गई है। दो वर्ष पूर्व बेटे (13.5 वर्ष) केे सीने में अचानक दर्द उठा और जब तक डाक्टर के पास ले जाते उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। बेटी की शादी के बाद से ससुराल वाले उसे नहीं ले गए हैं। -रश्मि गुप्ता, रुद्रपुर

कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की
घर में आपसी झगड़े के कारण मेरी बहन पुष्पा देवी तेजाब से झुलस गई। बच्चों का मुंह देखकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है और सभी सुविधाएं हैं। तेजाब पीड़ितों के लिए ऐसे कैंप भविष्य में भी होने चाहिए। शांति राणा, बागेश्वर
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