रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी की सफाई व्यवस्था को लेकर ठोस नीति नहीं बन पा रही है। कर्मचारियों के अभाव में एक साल पूर्व छावनी परिषद ने यह व्यवस्था ठेके पर दे दी थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
छावनी परिषद की बैठक में यह मुद्दा जोर शोर से उठने के बाद बोर्ड में ठेका व्यवस्था निरस्त करने पर सहमति बनी। जनवरी महीने से सफाई कर्मचारी आउट सोर्सिंग से रखे जाएंगे। बैठक में लीज नवीनीकरण, दाखिल खारिज के कई मसलों का भी निस्तारण किया गया।
अध्यक्ष कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के कमांडेंट ब्रिगेडियर आतेश चहार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभासदों ने अपने अपने वार्डों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले पर्यटक कड़वे अनुभव लेकर यहां से लौट रहे हैं।
बता दें कि छावनी परिषद ने पूर्व में यह व्यवस्था दिल्ली की एक संस्था को ठेके पर दी हुई है। छावनी परिषद कंपनी को 7.45 लाख रुपये महीना भुगतान कर रही है, लेकिन फिर भी सार्वजनिक स्थानों पर खुले में गंदगी बहती है, नियमित रूप से गली मोहल्लों का कूड़ा नहीं उठ रहा है। बैठक में ठेका व्यवस्था निरस्त करने की संस्तुति हुई।
यदि यह व्यवस्था निरस्त होती है तो एक महीने के बाद पुरानी व्यवस्था के तहत ही कार्य होगा, इसके लिए आउट सोर्सिंग के माध्यम से 43 कर्मचारी रखे जाएंगे। इस मौके पर लीज नवीनीकरण, दाखिल खारिज के मामलों का निस्तारण हुआ। जबकि कई भवनों की मरम्मत को भी संस्तुति दी गई।
बैठक में सीईओ ज्योति कपूर, उपाध्यक्ष मोहन नेगी, सभासद भुवन आर्या, संजय पंत, बिंदु रौतेला, अर्चना पाठक, सुकृत शाह, विनोद चंद्र के अलावा कर्नल एस श्रीवास्तव आदि भी मौजूद रहे।
आंतरिक सड़कों की बदहाली का मुद्दा भी उठा
रानीखेत। छावनी परिषद की बैठक में बर्खास्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घनश्याम तिवारी के मुद्दे पर भी लंबी चर्चा हुई, लेकिन किसी भी फैसले के लिए आगामी बैठक तक का इंतजार करना होगा। सभासद संजय पंत ने आंतरिक सड़कों की बदहाली का मुद्दा भी अध्यक्ष के सम्मुख उठाया। सड़कों के सुधारीकरण की मांग भी उठाई।