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जिले के 21 मासूम कहां गए, कोई नहीं जानता

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हल्द्वानी। जिले के 21 परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चों को लापता हुए 17 साल हो गए हैं। पुलिस उनका अब तक पता नहीं लगा पाई है। ऑपरेशन स्माइल के तहत सिर्फ 35 बच्चों की ही तलाश हो पाई। बच्चों को बरामद करने के लिए गठित स्माइल टीम सुस्त पड़ी है।
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जिला पुलिस के अनुसार वर्ष 2000 से लेकर 31 अक्तूबर 17 तक लापता हुए 13 बालक और आठ बालिकाओं का पता नहीं चल सका है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार मुकदमा दर्ज होने पर 11 बालक और बालिकों को पुलिस ने बरामद किया। बिना मुकदमा दर्ज किए 18 बालक और छह बालिकाएं बरामद की गई हैं। एसएसपी जन्मेजय खंडूरी का कहना है कि स्माइल टीम सक्रिय है। बच्चों को बरामद करने की कार्रवाई चल रही है।

प्रकाश और मोइन का नहीं चला पता
एचएन इंटर कालेज में 11 वीं में पढ़ने वाले प्रकाश सिंह का दस नवंबर से पता नहीं चल सका है। हैदराबाद के महबूबनगर निवासी मो. साबिर का चार साल का बेटा मोइन 2014 में ट्रेन से लापता हो गया था। साबिर इन दिनों उसे हल्द्वानी में तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे की लोकेशन हल्द्वानी में मिली थी लेकिन पुलिस की जांच में उसका भी पता नहीं चल सका है।
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11 माह में 866 शिकायतें हुई दर्ज
नैनीताल। बच्चों के हक हकूक और बाल सुरक्षा के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था विमर्श के पास 11 महीने में बाल उत्पीड़न और बाल श्रम समेत अलग अलग मामलों में बच्चों से संबंधित 866 शिकायतें दर्ज हुई हैं। विमर्श संस्था की मुख्य ट्रस्टी कंचन भंडारी ने बताया कि जनवरी 2017 से नवंबर तक संस्था में कुल 866 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें 86 मामलों में बच्चों को समुचित इलाज न मिलने, 49 बच्चों को रहने के लिए जगह दिलाने, 19 बच्चों की गुमशुदगी होने, 130 मामलों में बाल यौन हिंसा होने, 35 मामलों में बाल मजदूरी कराने, बाल भिक्षावृति के 4 मामले प्रमुख थे। इन मामलों पर कार्रवाई करते हुए संस्था द्वारा सभी 86 बच्चों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई और 49 बच्चों को बाल आश्रय गृह भेजा गया। लापता हुए और बाद में पुलिस अथवा लोगों द्वारा बरामद किए गए 73 बच्चों को उनके मां-बाप से मिलाया गया। इसके अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 129 बच्चों को सपोर्ट एंड गाइडेंस कार्यक्रम के तहत उनकी काउसलिंग की गई। उन्होंने बताया कि अकेले हल्द्वानी क्षेत्र में अभी भी 15 से 20 बच्चों के बाल श्रम में लिप्त होने की सूचना उनके पास है जिसकी जानकारी श्रम विभाग को पत्र और मेल द्वारा भी दी जा चुकी है लेकिन उक्त बच्चों को विभागीय स्तर पर बाल श्रम से मुक्त नहीं किया गया है।

20 नवंबर तक चाइल्ड लाइन दोस्ती सप्ताह
नैनीताल। विमर्श संस्था की हेल्पलाइन में मौजूद विनोद कुमार ने बताया कि 14 नवंबर से 20 नंवबर तक संस्था द्वारा जिले भर में चाइल्ड लाइन दोस्ती सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान संस्था से जुड़े लोग अलग अलग स्थानों, सरकारी विभागों, निजी प्रतिष्ठानों आदि तक पहुंचकर लोगों को बाल श्रम न कराने के लिए जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कहीं कोई बाल श्रम, बाल उत्पीड़न और बाल यौन शोषण जैसी कोई शिकायत हो तो इसकी सूचना टाल फ्री नंबर 1098 पर दी जा सकती है।

जिले में दस महीने में गुम हुए 34 बच्चे
नैनीताल। बीते दस माह के दौरान कुमाऊं मंडल के विभिन्न जनपदों में अपहरण और गुमशुदा बच्चों की संख्या 92 थी जिसमें से पुलिस ने मुस्कान समेत अन्य अभियानों के बाद 69 बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया जबकि लापता हुए 23 बच्चों का आज तक कहीं पता नहीं चल सका है। पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल पहली जनवरी से लेकर 31 अक्तूबर तक कुमाऊं मंडल में एक से 14 साल तक के 92 बच्चे लापता हुए। इनमें से कुछ अपहरण का भी शिकार बने। इनमें सबसे अधिक बच्चे ऊधमसिंह नगर से लापता हुए जबकि अल्मोड़ा से इस अवधि में एक भी बच्चा लापता नहीं हुआ। ऊधमसिंह नगर से 52 बच्चे लापता हुए जिसमें से अब तक 40 बच्चे सकुशल बरामद कर लिए गए हैं। नैनीताल जिले से लापता 34 बच्चों में से 25, बागेश्वर में पंजीकृत तीन में से दो, पिथौरागढ़ में दो में से एक बच्चा बरामद हो चुका है। वहीं चंपावत जिले मे एक बच्चा गुम हुआ था जो बाद में मिल गया।
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