हल्द्वानी। चावल घोटाले में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों का खेल खेलकर सरकार ने विपक्ष के हमले की धार को कुंद करने की कोशिश की है। हालांकि, खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दो दिन में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया था। विशेष जांच दल की रिपोर्ट सामने आने के चार दिन बाद भी हाल यह है कि एक भी कर्मी को आरोप पत्र जारी नहीं किया जा सका है।
चावल घोटाले मेें विशेष जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुमाऊं के संभागीय खाद्य नियंत्रक विष्णु सिंह धानिक को बर्खास्त करने का ऐलान किया था। सियासी गलियारे में यह गूंजता आया है कि धानिक एक कांग्र्रेसी नेता के भी खास हैं और कांग्रेस सरकार की कृपा से सेवा विस्तार का मौका पा गए थे। बाद में यह साफ हुआ कि धानिक को बर्खास्त नहीं किया गया, बल्कि उनका सेवा विस्तार समाप्त किया गया था। माना यह गया कि धानिक के जरिए भाजपा की कोशिश कांग्रेस को दबाव में लेने की थी।
अब तबादलों के खेल के जरिए एक बार फिर यह साबित हो रहा है कि सरकार चावल घोटाले में भ्रष्टाचार पर वार करने की चिंता में दुबली नहीं हो रही है। बल्कि, इस मामले में सियासत का रंग और गहरा होता जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले तो कर दिए गए हैं पर उनके अधिकार और दायित्व बरकरार हैं। ऐसे में तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए तबादलों का मतलब धान खरीद के नए सत्र में मन की मुराद पूरी होने जैसा ही है।
कांग्रेस के रुख से साफ है कि चावल घोटाला सामने आने पर वह अपने बचाव में आक्रामक होने को बेहतर रणनीति मान रही है। ऐसे में धानिक के मामले के बाद अगर सरकार चुप बैठ जाती तो कांग्रेस को खुलकर खेलने का मौका भी मिल जाता। माना जा रहा है कि इससे बचने के लिए ही व्यापक स्तर पर तबादले किए गए ताकि यह संदेश भी जाए कि चावल घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
संपत्ति की जांच होने पर सामने आ सकता है सच
हल्द्वानी। खाद्य विभाग से लेकर अन्य संबधित पक्षों के बीच दबी जुबान में यह भी कहा जाता रहा है कि पिछले दो साल से खेले जा रहे इस करोड़ों के घोटाले के खेल में शामिल एक-एक व्यक्ति इस समय तक खासा पैसा कमा चुका है। साफ है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की ही अगर जांच हो जाए तो बहुत कुछ सामने आ सकता है।
धान खरीद में लगे कर्मचारियों को भी बख्श दिया
हल्द्वानी। तबादलों को ही अगर कार्रवाई माना जा रहा है तो साफ है कि सरकार ने धान खरीद में लगे कर्मचारियों को बख्श दिया है। एसआईटी की जांच में साफ है कि खरीद से लेकर वितरण तक में खेल कर चावल घोटाले को अंजाम दिया गया। तबादले भी सिर्फ चावल विपणन में लगे कर्मियों का किया गया।