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केक काटा और बोले, हैप्पी बर्थडे राजभवन

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नैनीताल। सरोवर नगरी के एतिहासिक भवनों में शुमार एवं विश्व धरोहर राजभवन के 121 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को नैनीताल जन्मोत्सव समिति की ओर से कार्यक्रम किया गया, इसमें केक काटकर राजभवन का स्थापना दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् प्रो.अजय रावत ने कहा कि नैनीताल को त्रि ऋषि सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, जिसका स्कंद पुराण में भी वर्णन है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1841 में नैनीताल में अंग्रेजों की ओर से बसासत की शुरुआत हुई थी। कहा कि जब देश के लिए ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में हिमाचल के शिमला को चुना गया तो वहीं उत्तर प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिए उत्तराखंड के नैनीताल नगर को चुना गया।
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कहा कि वर्ष 1862 में सबसे पहले नौर्थ वेस्ट प्रोविंस के लेफ्टिनेंट गवर्नर का प्रवास शुरू हुआ। वर्ष 1862 में प्रथम राजभवन रैमजे परिसर हुआ करता था, इसके बाद 1865 में राजभवन मालडन हाउस में स्थानांतरित हुआ। वर्ष 1875 में सेंटलू गार्ज स्नोव्यू में राजभवन स्थानांतरित हो गया जो भवन आज भी मौजूद है और वहां पर वर्तमान में कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से पर्यटक आवास गृह संचालित किया जा रहा है। प्रो.रावत ने बताया कि गौथिक शैली पर निर्मित वर्तमान राजभवन ई आकार में बना है, जिसकी नींव 27 अप्रैल 1897 में रखी गई थी। बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बना उत्तराखंड का राजभवन आज विश्व की धरोहरों में शुमार है।
शनिवार को नैनीताल के तल्लीताल स्थित सेंट जोजफ बोट हाउस क्लब फांसी गधेरा में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो.रावत समेत गीता साह, फादर जेरम, एसएस बल ने केक काटकर किया। इससे पहले नैनीताल जन्मोत्सव समिति के वरिष्ठ सदस्य दीपक बिष्ट उर्फ दीपू ने सभी का स्वागत किया। इस मौके पर ममता जोशी, खष्टी दत्त पांडे, ईशा साह, चंद्र शेखर नैनवाल, प्रदीप अधिकारी, अवतार सिंह, भाष्कर बिष्ट आदि थे।
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केक काटा और बोले, हैप्पी बर्थडे राजभवन
नैनीताल राजभवन के 121वें जन्मोत्सव पर सरोवर नगरी में हुए कार्यक्रम
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