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दिसंबर में ही नाशपाती के पेड़ फलों से लकदक

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बेतालघाट में दिसंबर में नाशपती। - फोटो : अमर उजाला
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गरमपानी (नैनीताल)। पहाड़ों में भी जलवायु परिवर्तन के लक्षण दिखने लगे हैं। इसी कारण जून में होने वाला नाशपाती दिसंबर में ही पेड़ों पर दिखने लगा है। खास बात यह है कि अक्तूबर में पेड़ों पर पतझड़ होता है, लेकिन पिछले इस समय नाशपाती के पेड़ों पर फल दिखाई देने लगे हैं।
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बेतालघाट ब्लॉक के ग्राम सिल्टोना, ढौन, दड़माड़ी, व्यासी गांव फल उत्पादक क्षेत्र हैं। इन गांवों में कई पेड़ों पर बेमौसमी नाशपाती के फल दिखाई देने लगे हैं। कई पेड़ों की टहनियों पर नई पत्तियां निकलने के साथ ही पेड़ों पर फल भी बड़े होने लगे हैं। काफी ठंड होने के बावजूद इन फलों की वृद्धि पर तापमान का भी कोई असर भी नहीं पड़ा जबकि अप्रैल से लगने वाली नाशपाती का फल जून-जुलाई में बाजार तक पहुंचाता है, जो किसान की आय का एक मुख्य साधन है। ग्राम सिल्टोना निवासी कमलेश शास्त्री बताते हैं कि अक्तूबर से नाशपाती के पेड़ों पर पतझड़ होता है, लेकिन पिछले कुछ समय से नाशपाती के पेड़ों पर फल दिखाई देने लगे हैं। पेड़ों पर बेमौसमी फल लगने से अप्रैल की मुख्य फलों की फसल के समय पैदावार कम होने का खतरा है। जाड़े में होने वाला फल ज्यादा बड़ा नहीं होता है जबकि गर्मी में अप्रैल तक पकने पर मीठा, रसीला होता है।

वैज्ञानिक शोध एवं कृषि विज्ञान केंद्र ज्योलीकोट के मुख्य अधिकारी प्रो. विजय दोहरे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह सेे ऐसा हो रहा है। अगर पेड़ों पर फल लग चुका है तो किसान फलों को पाले से बचाएं। अधिक पाला फलों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। शुरुआत की फसल होने से किसानों को बाजार में सही दाम मिल सकते हैं।
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पहाड़ में दिखने लगा जलवायु परिवर्तन का असर
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