रानीखेत (अल्मोड़ा)। सरकारों की उपेक्षा के चलते पर्यटन नगरी से लगे कस्बों की हालत आज तक नहीं सुधरी है। राज्य बनने के बाद इनके विकास की उम्मीदें थीं, लेकिन शहर बन चुके इन कस्बों में शौचालय तक नहीं हैं, जिस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर से सटा चिलियानौला कस्बा भी तमाम दुश्वारियों से जूझ रहा है। यहां सबसे अधिक लोग कूड़े से परेशान हैं। निस्तारण की सुविधा नहीं होने से चारों तरफ कूड़े ढेर के हैं।
मालूम हो कि रानीखेत छावनी परिषद के अधीन होने के कारण यहां लोगों को भवन निर्माण और मरम्मत आदि कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पिछले एक दशक से नौकरीपेशा अधिकांश लोग रानीखेत में भवन न बनाकर अब चिलियानौला में भवन बनवा रहे हैं, जिसके चलते कस्बे की आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन यहां न तो सार्वजनिक शौचालय बने हैं और ना ही सड़कों के किनारे निकास नालियां हैं। सबसे अधिक दिक्कतें कूड़ा निस्तारण की है। लोग नालों में कूड़ा डाल देते हैं, जिस कारण तीव्र बदबू के चलते वहां लोगों का जीना दूभर हो जाता है। पूर्व में ग्राम पंचायत के अधीन होने के कारण यहां निस्तारण की व्यवस्थाएं नहीं बन पाईं। हालांकि बीडीसी मद से कूड़ेदान तो लगे, लेकिन निस्तारण नहीं होने के कारण यह कूड़ा सड़ जाता है। पानी की दिक्कत भी कस्बे में रहती है। यहां जल संस्थान तीन दिन में एक बार पानी देता है वह भी पर्याप्त नहीं होता। पारंपरिक स्रोतों का जल स्तर घट चुका है। सड़कों के किनारे निकास नालियां नहीं होने के कारण बरसाती पानी दुकानों के अंदर घुस जाता है, जिस कारण लोग खासे परेशान हो जाते हैं।
चिलियानौला कस्बे में अदद शौचालय तक नहीं, कूड़े से पटे हैं डेस्टबिन
निरंतर बढ़ रही है आबादी, सुविधाएं शून्य होने से लोग हो रहे परेशान
पालिका बनने से है नागरिकों को काफी उम्मीदें
रानीखेत। चिलियानौला को नरपालिका का दर्जा मिल चुका है। अब यहां चुनाव होंगे। इसके बाद व्यवस्थाएं सुधरने की उम्मीद है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पालिका बनने से लोगों को कूड़े की बदबू से निजात मिलेगी और सार्वजनिक शौचालय आदि भी बनेंगे।