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बर्बाद हुई फसल के मुआवजे का मानक बदले सरकार

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खेतों में कटी पड़ी फसल - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। भरपूर मेहनत के बाद भी किसानों के लिए खेतीबाड़ी फायदे का सौदा साबित नहीं हो रहा है। कभी सूखे से फसल बर्बाद हो रही है तो कभी बारिश आफत बनकर बरस रही है। इसके बावजूद किसानों को मुआवजे के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिल रहा है। इससे परेशान किसानों ने फसल मुआवजे के मानक बदलने की मांग की है। गौलापार में शनिवार को हुई बैठक में किसान राजेंद्र सिंह चुफाल ने किसान समर्थन मूल्य आयोग के स्थान पर लागत मूल्य आयोग गठित करने की मांग उठाई, जबकि बीडीसी सदस्य अर्जुन सिंह बिष्ट, किशनपुर रैक्वाल के प्रधान तारा सिंह बिष्ट, बीडीसी सदस्य नरेंद्र सिंह चुफाल, प्रकाश बिष्ट, प्रकाश पांडे, महेश चंद्र, गोपाल बोरा आदि ने नुकसान के बराबर मुआवजा मांगा। तय किया गया कि मुआवजे के मानक बदलने की मांग को लेकर शीघ्र ही कृषि मंत्री और डीएम से वार्ता की जाएगी क्योंकि पिछले साल जाडे़ में एक दिन भी बारिश नहीं हुई थी, जिस कारण असिंचित जमीन में बोई गईं फसलें बर्बाद हो गई थी। अब गेहूं कटाई का समय आया तो बारिश आफत बनकर बरसी और हजारों एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। मुआवजे के मानकों में विसंगति के चलते किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका। अब मुआवजे के यही मानक एक बार फिर से किसानों के आड़े आने वाले हैं, क्योंकि नियमानुसार बारिश से 50 फीसदी, ओलावृष्टि आदि से 33 फीसदी से अधिक नुकसान होने पर ही किसानों को मुआवजा दया जाता है।
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