हल्द्वानी। राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य छात्र निधियों में जमा धनराशि को अब मनमाने ढंग से खर्च नहीं कर पाएंगे। इस पर उच्चशिक्षा निदेशालय ने तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। छात्र निधियों की धनराशि से कोई भी निर्माण कार्य या अनुरक्षण कार्य करने से पूर्व निदेशालय स्तर से संस्तुति लेनी जरूरी होगी। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में छात्र निधि से लाखों रुपये के निर्माण कार्य कराने, दूसरे कार्यों पर खर्च करने की शिकायतें शासन को मिलने के बाद उच्चशिक्षा निदेशालय ने सख्त कदम उठाया है।
उच्चशिक्षा निदेशक डॉ. बीसी मलकानी की ओर से प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं कार्यालय प्रभारी द्वारा छात्र निधियों का समुचित एवं नियमानुकूल रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में आडिट आपत्तियों के अलावा शासन को भी शिकायतें मिल रही हैं। निदेशक ने प्राचार्यों को आदेश दिए हैं कि महाविद्यालय में छात्र निधियों में जमा धनराशियों का प्रयोग अनुरक्षण कार्यों एवं निर्माण कार्यों में बिना शासन की वित्तीय स्वीकृति या सक्षम स्तर से पूर्वानुमति के शुरू न किया जाए। किसी भी प्रस्तावित करने वाले निर्माण कार्य के लिए डीपीआर गठित किए जाने से पूर्व प्रयोग किए जाने वाली छात्र निधि की वस्तु स्थिति एवं अनुमानित व्यय के आकलन के साथ ही कार्यदायी संस्था नामित किए जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाए। कार्यदायी संस्था नामित होने के बाद नामित कार्यदायी संस्था से न्यूनतम आवश्यकतानुसार डीपीआर तैयार कराकर निदेशालय स्तर की संस्तुति के लिए प्रस्तुत की जाए।
उच्चशिक्षा निदेशालय ने पाबंदी लगाई, एमबी कॉलेज की शिकायत के बाद कदम उठाया
इस मद के लाखों रुपये दूसरी मद में खपाने का मामला