हल्द्वानी। अब सामान्य जाति के शिल्पियों का भी हुनर निखारने में केंद्र सरकार मदद करेगी। जिला उद्योग केंद्र पहली बार सामान्य जाति के शिल्प कलाकारों को अनुभवी कलाकारों से प्रशिक्षण देने जा रहा है। इन अभ्यर्थियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
एकीकृत हस्त शिल्प विकास प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जिला उद्योग केंद्र मासिक तौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति के 30 अभ्यर्थियों को एक माह का प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण में योग्य और अनुभवी मास्टर ट्रेनर शिल्पियों को नए नए डिजाइन विकसित करने के तरीके एवं बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद बनाने की बारीकियां सिखाते हैं। बाद में इन उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है।
इधर नैनीताल जनपद में इस प्रशिक्षण के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति के अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे हैं वहीं सामान्य जाति के अभ्यर्थियों का शिल्प कला के प्रति रुझान बढ़ा है। इस पर केंद्र सरकार ने सामान्य जाति के अभ्यर्थियों को भी प्रशिक्षित करने का फैसला किया है। अब प्रशिक्षण में 25 फीसदी सामान्य जाति के अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है। यानी छह अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
सामान्य जाति के अभ्यर्थियों के साथ पहला प्रशिक्षण नए साल में जनवरी के पहले सप्ताह में किया जाएगा। इस बाबत जिला उद्योग केंद्र ने पात्र अभ्यर्थियों की तलाश शुरू कर दी है ताकि उनका हुनर संवारा जा सके।
पात्रता के लिए जरूरी है शिल्प का ज्ञान
एकीकृत हस्त शिल्प के लिए कोई खास शर्तें नहीं हैं बस अभ्यर्थी को शिल्प का बुनियादी ज्ञान होना जरूरी है। अभ्यर्थी अपने बनाए उत्पादों के साथ जिला उद्योग केंद्र में आवेदन करेगा। जहां महाप्रबंधक प्रारंभिक जानकारी का स्तर जांचने के बाद अभ्यर्थी को प्रशिक्षण के लिए अनुमति प्रदान करेंगे।
एकीकृत हस्त शिल्प विकास योजना में पहली बार सामान्य जाति के अभ्यर्थियों को भी शिल्प कला का हुनर संवारने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
-वाई सी पांडे, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र