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उच्चशिक्षा के 28 से अधिक प्रोफेसरों ने शासन के आदेश को दिखाया ठेंगा

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हल्द्वानी। राज्य के विभिन्न डिग्री कॉलेजों में लंबे समय से जमे 28 से अधिक असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों ने शासन के तबादला आदेश को ठेंगा दिखा दिया है। पहले तो इन प्रोफेसरों ने नेताओं की परिक्रमा कर तबादला स्थान बदलवाने के प्रयास किए जब इसमें कामयाबी नहीं मिली तो ज्वाइन करने के बजाय चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए। इस मामले की रिपोर्ट उच्चशिक्षा निदेशालय ने शासन को भेज दी है। राजकीय महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर 15 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे थे। सत्ता बदलने पर उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने उच्चशिक्षा निदेशालय से 10 से 20 साल तक विभिन्न महाविद्यालयों में जमे ऐसे प्रोफेसरों की सूची तैयार कराई। पिछले माह में पहले 71 असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों के स्थानांतरण किए। इसके बाद अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह के आदेश से 82 की दूसरी सूची जारी की गई। इन दोनों तबादला सूची में चार प्राचार्य भी शामिल थे। शासन ने सभी प्रोफेसरों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर ज्वाइन करने को कहा था। उच्चशिक्षा निदेशालय को पता चला है कि 28 से अधिक प्रोफेसरों ने अब तक ज्वाइन ही नहीं किया है जबकि उन्हें संबंधित महाविद्यालय से कार्यमुक्त किया जा चुका है। ये सभी प्रोफेसर चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए हैं। उच्चशिक्षा निदेशक डॉ. बीसी मेलकानी ने बताया कि स्थानांतरण आदेश का अनुपालन न करने वाले प्रोफेसरों की सूची तैयार कर शासन को भेज दी गई है।
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महाविद्यालयों में 20-20 वर्षों से जमे असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को तबादला पिछली सरकार तो कर नहीं सकी जिसे हमने करके दिखाया है। स्थानांतरित 149 में से लगभग 28 प्रोफेसरों के ज्वाइन न करने की रिपोर्ट मिली है। तबादला आदेश को न मानने को लेकर शासन गंभीर है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
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- डॉ. धनसिंह रावत, उच्चशिक्षा मंत्री
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