प्रदेश में टेबलेट से होगी पशुगणना
हल्द्वानी।
देश में इस बार पशु गणना टेबलेट से होगी। पशुगणना का सारा डेटा ऑनलाइन दर्ज होगा। पशुओं की गणना के साथ ही इस बार उनका ब्रीड आइडेंटिफिकेशन भी होगा। पशुगणना जुलाई से शुरू होनी थी लेकिन टेबलेट खरीद में देर होने के कारण इस समय सीमा को स्थगित कर दिया गया है। नई तारीख का एलान अभी नहीं हुआ है। पिछली पशुगणना 2012 में हुई थी। हर पांच साल में पशुगणना होती है।
प्रदेश में पशुगणना के लिए खरीदे जाएंगे 1220 टेबलेट
प्रदेश में इसकी तैयारी के लिए 1220 टेबलेट खरीदे जाएंगे। इसमें लगभग एक करोड़ का खर्चा आएगा। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 56 लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। लेकिन पशुपालन निदेशालय ने भारत सरकार से इस प्रतिशत को विशेष राज्य होने के कारण 90 और 10 के अनुपात में रखने को लेकर पत्र लिखा है।
निदेशालय ने शुरू कराई ट्रेनिंग
पशुगणना जुलाई में प्रस्तावित है इसे देखते हुए पशुपालन निदेशालय ने डॉक्टरों और कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है। देहरादून में दो बार इसकी ट्रेनिंग हो चुकी है। टेबलेट खरीदारी और उसमें सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद अंतिम ट्रेनिंग होगी।
पशु संजीवनी योजना के लिए मांगे 3.28 करोड़
पशुपालन निदेशालय ने पशु संजीवनी योजना के तहत 3.28 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। प्रस्ताव में भारत सरकार की ओर से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। अब जल्द ही प्रदेश के सभी पशुओं का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन होगा। सभी पशुओं में 12 अंकों का टैंगिंग नंबर लगेगा।
इस बार पूरे भारत में टेबलेट से पशुगणना होनी है। इसके लिए 1220 टेबलेट खरीदे जाएंगे। इसके लिए 57 लाख रुपये मिले हैं। - एचएस बिष्ट, डायरेक्टर पशुपालन