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प्रदेश वासियों के हक पर नहीं डालने देंगे डाका : किशोर

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वनाधिकार लेकर रहेंगे - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। वनाधिकार कानूनों में बदलाव को लेकर कांग्रेसियों ने सभा कर हुंकार भरी। इस दौरान आठ प्रस्ताव पास किए गए। तय किया गया कि आंदोलन को धार देने के लिए छह महीने में छात्र-छात्राओं और प्रदेश की महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा।
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शनिवार को बिठौरिया नंबर दो स्थित एक बरात घर में आयोजित सभा में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वनाधिकार आंदोलन के संयोजक किशोर उपाध्याय ने कहा कि ऐसे कानूनों का पुरजोर विरोध किया जाएगा, जो प्रदेश के निवासियों को हक-हकूक देने से रोकते हैं। प्रदेशवासियों के हक पर डाका नहीं डालने दिया जाएगा। कहा कि जल और जंगल बचाने में महिलाओं का विशेष योगदान रहा है। इसलिए आंदोलन से महिलाओं और स्कूली छात्रों को जोड़ा जाएगा। कथावाचक नमन कृष्ण ने कहा कि हमें गलतियों को सहने के बजाय विरोध करना चाहिए। यह आंदोलन हमारे अस्तित्व से जुड़ा है। इस मौके पर पूर्व सांसद महेंद्र पाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल, पूर्व विधायक सरिता आर्य, नारायण पाल, जोत सिंह बिष्ट, मथुरा दत्त जोशी, जगदीश तनेजा, सुरेश गौरी, प्रेम बहुखंडी, संजय भट्ट, सतीश नैनवाल, सीपी शर्मा, महेंद्र भट्ट, सुमित हृदयेश, आनंद रावत, मनोज खुल्बे, बीना जोशी, शेखर जोशी, भोला भट्ट, रेणु नेगी, डॉ. केदार पलड़िया, किरन डालाकोटी आदि थे।

महिलाओं-छात्रों को जोड़ वनाधिकार आंदोलन को देंगे धार
हल्द्वानी में हुई सभा में आठ प्रस्ताव पास, प्रदेश वासियों के हक पर नहीं डालने देंगे डाका : किशोर

ये आठ प्रस्ताव पास किए गए
1 - आंदोलन के लिए स्कूलों में अभियान चलाएंगे।
2 - आंदोलन से महिलाओं को जोड़ेंगे।
3 - अगले चरण में ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर आंदोलन होगा।
4 - वनाधिकार आंदोलन के लिए जिला, विधानसभा स्तर पर इकाइयां गठित होंगी।
5 - प्रदेश वासियों को एक सीमा तक पानी मुफ्त दिया जाएगा।
6 - दिसंबर तक मुफ्त पानी न मिलने पर जनवरी 2020 के बाद बिल नहीं दिया जाएगा।
7 - आने वाले पंचायत चुनावों में वनाधिकार को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।
8 - वन ग्रामों में लोगों के नाम वोटरलिस्ट में जुड़वाए जाएंगे और पौधरोपण के लिए वन विभाग से पौध खरीदे जाएंगे।



वनाधिकार आंदोलन से जमीन तलाशने की कोशिश में कांग्रेस
आंदोलन में कांग्रेस के बडे़ नेता हैं सक्रिय, न्याय पंचायत स्तर से आंदोलन की रणनीति तैयार
हल्द्वानी। चुनावों में लगातार शिकस्त खा रही कांग्रेस वनाधिकार आंदोलन के बहाने प्रदेश में अपनी जमीन तलाशने में जुटी है। इस आंदोलन के पीछे सक्रिय रूप से कांग्रेस के बड़े नाम वाले चेहरे काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जिस रणनीति के तहत कांग्रेस इस आंदोलन को जन आंदोलन में बदलने का प्रयास कर रही है उसे विधानसभा चुनाव में प्रदेश में वापसी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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कांग्रेस 2012 में प्रदेश की सत्ता में थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। विधानसभा चुनाव के बाद नगर निकाय और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इधर, वनाधिकार कानून में बदलाव अभी केंद्र स्तर पर प्रस्तावित है। इसी प्रस्ताव की सुगबुगाहट पर कांग्रेस के आंदोलन की बुनियाद खड़ी है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने इसी पर वनाधिकार आंदोलन खड़ा किया है। आंदोलन में प्रमुख नौ मुद्दे हैं और सभी पहाड़ के निवासियों के जीवन से जुडे़ हैं। वनाधिकार आंदोलन में कांग्रेस के पदाधिकारी स्कूली छात्रों, ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर आंदोलन की रणनीति तैयार कर चुके हैं।
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ये हैं वनाधिकार आंदोलन के नौ मुद्दे
1 - उत्तराखंड वनवासी राज्य बने, सरकारी नौकरियों में मिले आरक्षण।
2 - दिल्ली की तर्ज पर राज्य के प्रत्येक निवासी को निशुल्क पेयजल मिले।
3 - वन उपज की रक्षा के एवज में प्रत्येक परिवार को एक रसोई गैस, 100 यूनिट बिजली मुफ्त मिले।
4 - पहले की तरह भवन निर्माण के लिए हर परिवार को रेत, बजरी, पत्थर, लकड़ी मुफ्त मिले।
5 - जड़ी-बूटी के दोहन का अधिकार बेरोजगार युवाओं को मिले।
6 - जंगली जानवरों के हमले में मृत या दिव्यांग के परिवार को 25 लाख का मुआवजा और नौकरी दी जाए।
7 - जंगली जानवर फसल को नुकसान पहुंचाएं तो उचित मुआवजा मिले।
8 - वनाधिकार कानून 2006 को लागू कर राज्य को हर साल 10 करोड़ का ग्रीन बोनस दिया जाए।
9 - तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों के सम्मान में 30 मई को वनाधिकार दिवस घोषित किया जाए।
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