नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग और राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय रुद्रपुर के संयुक्त तत्वावधान में बृहस्पतिवार से जलवायु परिवर्तन पर दो दिनी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। नगर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों ने मध्य हिमालयी क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों एवं इन्हें कम करने पर मंथन किया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान अल्मोड़ा के डायरेक्टर डॉ.आरएस रावल और विवि कुलपति प्रो.केएस राना ने दीप जलाकर किया। कुलपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान के लिए हिमालयी क्षेत्र में शोध कार्यों को बढ़ावा देने की जरूरत है, इसमें स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाए। भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष पीसी तिवारी ने कार्यशाला की रूपरेखा बताई। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों द्वारा जलवायु परिवर्तन के संबंध में हुए अब तक के शोधकार्य पर मंथन किया गया, जबकि दूसरे दिन ग्रामीण जनता और सरकारी विभागों के अधिकारियों के बीच परिचर्चा की जाएगी। इसके लिए शुक्रवार को रामगढ़ विकासखंड के 30 ग्राम प्रधानों, वन पंचायत के सरपंचों और सरकारी विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। इस दौरान कई लोगों ने अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। कार्यशाला में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलॉजी रुड़की के डॉ. एसएम पिंगल, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग न्यू कैसल यूनिवर्सिटी यूके से डॉ. नाथन फारसिंथ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग से डॉ. भाष्कर निकम, डॉ. बीआर कौशल, प्रो. जया तिवारी, प्रो. बीएल साह, प्रो. ललित तिवारी, डॉ. नागेंद्र शर्मा, प्रो.एलएस लोधियाल, डॉ. एसएस बर्गली, डॉ. नीलू लोधियाल, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. भगवती जोशी, डॉ. नीता पांडे, प्रो. जीएल साह, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. बदरीश महरा, विधान चौधरी आदि थे।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों एवं इन्हें कम करने पर मंथन
कुमाऊं विवि के भूगोल विभाग, राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय रुद्रपुर की दो दिनी अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू