नैनीताल। बलियानाला में भूस्खलन की जद में आए आवासों को खाली कराने का अभियान बुधवार को भी जारी रहा। स्थानीय लोगों से नोकझोंक और विरोध के बीच प्रशासन ने तीसरे दिन 6 आवासों को ध्वस्त किया। साथ ही खाली कराए गए दो परिवारों को दुर्गापुर स्थित पालिका आवासों में विस्थापित किया गया।
बुधवार को प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो दर्जनों लोगों ने विरोध करते हुए प्राधिकरण सचिव हरबीर सिंह का घेराव किया और ध्वस्तीकरण रोकने की मांग की। हरिनगर, बूचड़खाना, बलियानाला बचाव संघर्ष समिति के लोगों ने उन्हें ज्ञापन भी सौंपा। मांग की कि लोगों को विस्थापित करना समस्या का हल नहीं है। बलियानाला क्षेत्र में वर्ष 1972 से भूस्खलन हो रहा है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा इसकी रोकथाम के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए। क्षेत्र में करीब 500 परिवार रह रहे हैं, प्रशासन कितने परिवारों को क्षेत्र से विस्थापित करेगा।
अब तक 92 लोगों को किया जा चुका है विस्थापित
बलियानाला भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में वर्ष 2014 से अब तक कुल 92 लोगों को दुर्गापुर पालिका आवासों में विस्थापित किया जा चुका है। क्षेत्र में भूस्खलन और प्रभावितों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2008 में विभाग की ओर से डीपीआर तैयार की गई थी। इसके तहत 200 आवासों का निर्माण किया जाना था। इसमें जेएनएनयूआरएम योजना के तहत दो चरणों में कुल 168 आवासों का निर्माण किया गया। वहीं आवासों के निर्माण के बाद वर्ष 2014-16 तक क्षेत्र के 53 परिवारों को विस्थापित किया गया। पिछले वर्षों में 13 अन्य लोगों को अस्थायी तौर पर दुर्गापुर में आवास आवंटित किए गए थे। क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन के बाद राजस्व, नगर पालिका और जीएसआई की टीम ने क्षेत्र का सर्वे कर खतरे की जद में आए अन्य 66 लोगों की सूची तैयार की थी, जिनको दुर्गापुर आवासों में आवंटित किया जाना है। इसमें से पिछले तीन दिनों में 26 लोगों को पालिका की ओर से आवास आवंटित कर दिए गए हैं।
कई पात्रों के नाम सूची से गायब
विस्थापित किए जाने को लेकर कई लोगों ने पालिका की पात्रता सूची में उनका नाम नहीं होने की बात कही। स्थानीय निवासी रजनी प्रसाद पत्नी सचिन प्रसाद ने बताया कि वह क्षेत्र में 25 से 30 वर्षों से रहे रहे थे, पिछले वर्ष भूस्खलन के बाद उन्हें क्षेत्र से जीआईसी स्कूल में अस्थायी तौर पर विस्थापित किया गया था, जहां व्यवस्थाएं सही नहीं होने के कारण उनका परिवार किराए के मकान में रह रहा है, लेकिन पालिका द्वारा तैयार की गई आवास आवंटन की पात्रता सूची में उनका नाम नहीं होने के कारण उन्हें आवास प्राप्त नहीं हो पाए है।
स्थानीय निवासी दिलीप माथुर ने बताया कि वह नगर में ही एक मोबाइल की दुकान में काम करते हैं वह और उनका परिवार 25 वर्षों से क्षेत्र में रह रहा था, उनके परिवार को भी पिछले वर्ष भूस्खलन के बाद जीआईसी में विस्थापित किया गया था। इसके बाद वह भी किराए के मकान में गुफा महादेव क्षेत्र में रहने लगे थे, इस कारण उनका नाम भी पात्रता की सूची में शामिल नहीं है।
कैंट कार्यालय और जीआईसी को खाली करने का आदेश
नैनीताल। जिला प्रशासन ने कैंट के सभी कार्यालय और गवर्मेंट इंटर कॉलेज को खाली करने का आदेश जारी किया है। ऐसा बलियानाले में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए किया गया है। बीते कई वर्षों से बरसात के दौरान बलियानाले में भारी मात्रा में भूस्खलन होता है। ऐसे में नाले के मुहाने पर बने भवनों को खतरा रहता है। इस पर तहसीलदार सदर भगवान सिंह ने कैंट एवं जीआईसी के अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा है कि बलियानाले में भूस्खलन का खतरा है। ऐसे में आप किसी अन्य स्थान पर विस्थापित हो जाएं। कैंट सूत्रों का कहना है कि कैलाखान स्थित एक हॉल में कैंट के कार्यालय, स्कूल एवं जीआईसी को विस्थापित किया जा सकता है। ब्यूरो
नोकझोंक के बीच भूस्खलन प्रभावितों के आवास तोड़े
दो परिवारों को दुर्गापुर स्थित पालिका आवासों में विस्थापित किया