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शिप्रा नदी के आसपास किया जाएगा पौधरोपण

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हल्द्वानी। अत्यधिक प्रदूषण और कम वर्षा के चलते प्रदेश की नदियों में पानी कम होता जा रहा है। प्रदेश की महत्वपूर्ण नदियों के पुनर्जीवन का कार्य मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में हो रहा है। रेपस्ना और अल्मोड़ा की कोसी नदी का काम मुख्यमंत्री के निर्देशन में सरकारी मशीनरी के साथ ही जन सहयोग से हो रहा है। शिप्रा नदी के आसपास भी पौधरोपण किया जाएगा।
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शनिवार देर रात सर्किट हाउस में मुख्य विकास अधिकारी विनीत कुमार ने बैठक में कहा कि बदलते मौसम चक्र में बारिश कम हो रही है। इससे नदियों में पानी की मात्रा घट रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के चलते नदियों के आसपास जल स्रोत भी सूखने लगे हैं। ऐसे में जल स्रोतों के रिचार्ज के साथ ही नदियों के पुनर्जीवन का कार्य किया जाना जरूरी है। शिप्रा नदी पुनर्जीवन कार्य का विस्तार रातीघाट एवं उसके आसपास के इलाकों तक किया गया है। प्रथम चरण में इस कार्य पर 13 करोड़ 45 लाख की धनराशि व्यय होगी। मानसून के दौरान 16 और 17 जुलाई को हरेला पर्व पर शिप्रा नदी के आसपास संबंधित विभागों एवं जन सहयोग से लाखों की संख्या में पौधरोपण किया जाएगा। कृषि, वन और उद्यान विभाग अभी से पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने का काम पूरा करने के साथ ही पौधों की व्यवस्था भी कर लें।
मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार ने बताया कि शिप्रा नदी को सदानीर बनाने के लिए वर्षा जल को रोकने एवं जमीन के अंदर रिसने के लिए 10 सेमी व्यास और 30 सेमी गहराई के इनफिल्ट्रेशन छिद्र बनाए जाएंगे। प्रति हेक्टेयर अधिकतम 600 इनफिल्ट्रेशन ट्रेंच बनाए जाएंगे। जिनकी सामान्यतया दूरी 10 मीटर होगी और ढाल के अनुसार दूरी कम की जाएगी। इसके साथ ही जल धारा को रिचार्ज करने वाले महत्वपूर्ण स्रोतों को जैविक चेकडैम, ड्राई स्टोन चेकडैम, चाल-खाल, जलकुंड को भी रिचार्ज करने का कार्य किया जाएगा। बैठक में जिला विकास अधिकारी रमा गोस्वामी, जिला उद्यान अधिकारी भावना जोशी, उप प्रभागीय वनाधिकारी जीडी तिवारी आदि थे।
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शिप्रा नदी के आसपास किया जाएगा पौधरोपण
सीडीओ की बैठक में नदियों के पुनर्जीवन पर जोर
बोले, प्रथम चरण में 13 करोड़ 45 लाख की धनराशि व्यय की जाएगी
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