हल्द्वानी। पेयजल और सिंचाई का एकमात्र स्रोत गौला बैराज के छह में से दो गेट क्षतिग्रस्त हैं। गौला के गेटों के क्षतिग्रस्त होने से रोजाना 10 क्यूसेक पानी बर्बाद हो रहा है। सोमवार को गौला का जलस्तर 76 क्यूसेक रह गया है। इसमें भी 10 क्यूसेक पानी रिस रहा है। शेष बचे 56 क्यूसेक पानी से पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
गौला बैराज के गेटों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग के 4.63 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को लोकसभा चुनाव आचार संहिता से पहले मंजूरी मिल चुकी है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एनसी पांडे ने बताया कि बैराज के गेटों के टूटने से रोजाना करीब 10 क्यूसेक पानी बर्बाद होता है। लेकिन इन दिनों पानी की बर्बादी की रोकथाम के लिए अस्थायी उपाय किए गए हैं। सोमवार को गौला का जलस्तर 76 क्यूसेक रिकार्ड किया गया। 30 क्यूसेक जलसंस्थान के ट्रीटमेंट को दिया जा रहा है। अब 46 क्यूसेक पानी ही सिंचाई के लिए बचा है। इसमें से 10 क्यूसेक बर्बाद होने से नहरों में पानी की काफी कमी हो गई है। सिंचाई के लिए पानी कम होने से रोस्टर से नहरें चलाई जा रही हैं। एक नहर को चौथे दिन पानी मिल रहा है। टेल एंड के इलाकों में किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
गौला बैराज से रोजाना बर्बाद हो रहा 10 क्यूसेक पानी
मंजूरी के बावजूद गेटों की मरम्मत को अभी नहीं मिली धनराशि
गौला बैराज के गेटों की मरम्मत के प्रस्ताव को शासन स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। विभागाध्यक्ष के स्तर पर तकनीकी एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इसे मंजूरी मिल गई है। चुनाव आचार संहिता की वजह से धनराशि नहीं मिली है। अब जल्द धनराशि मिलने की उम्मीद है। धनराशि मिलते ही गेटों की मरम्मत करा दी जाएगी।
- मोहन चंद्र पांडे, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग।