नैनीताल। बलिया नाले के मुहाने बसे परिवार वर्षाकाल बीतने के दो महीने बाद भी दहशत से नहीं उभर सके हैं। हर साल बारिश समाप्त होने के साथ ही नाले में भूस्खल बंद हो जाता था और स्थानीय लोग आठ महीने बेफिक्र होकर जीवनयापन करते थे जबकि इस साल ऐसा नहीं है। भूस्खलन लगातार जारी है और स्थानीय लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। नाले में फूट रहीं दो जलधाराएं कंकड़, पत्थर, छोटी पहाड़ी आदि बहाकर ले जा रहीं हैं। इसके चलते भूस्खलन नहीं रुक सका है।
बलिया नाले में सालों से भूस्खलन जारी है। हर साल बारिश के दौरान नाले के आसपास बसे परिवार दहशत में रहते हैं। कई साल से यहां भूस्खलन रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। करोड़ों रुपये नाले में बह गए, लेकिन अभी तक कोई स्थायी हल नहीं निकल सका। इस साल जुलाई में बारिश शुरू हुई तो यहां रहने वालों के होश उड़ गए। धीरे-धीरे चट्टानें नाले में खिसकने लगीं और सात मकान नाले में समा गए। दस से ज्यादा परिवार सड़क पर आ गए, जिन्हें प्रशासन ने स्कूलों में विस्थापित कर दिया। जुलाई से अक्तूबर तक यहां के लोग भूस्खलन के चलते दहशत में रहे। अक्तूबर में बारिश बंद हुई तो लोगों ने सोचा कि अब अच्छे दिन आने वाले हैं, लेकिन बारिश बीतने के दो महीने बाद भी भूस्खलन नहीं रुका तो चिंता फिर से बढ़ गई है। तीन दिन पहले जीआईसी मैदान से सटी कुछ चट्टानें बलिया नाले में समा गईं। इसको लेकर फिर से एक बार स्थानीय बाशिंदे दहशत में आ गए हैं। भूस्खलन की मुख्य वजह नाले में बह रहीं दो जलधाराएं आज भी बह रहीं हैं। इसको लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है। उनकी यह चिंता कब खत्म होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
भूस्खलन शीतकाल में भी बना खतरा
बलिया नाले में बारिश समाप्त होने के दो महीने बाद भी हो रहा भूस्खलन
दो जलधाराएं अपने साथ बहाकर ले जा रहीं मलबा, छोटी चट्टानें
सब सरफेस वाटर के रिसाव के कारण बहुत कम मात्रा में भूस्खलन हो रहा है। भूस्खलन को रोकने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर शासन स्तर पर प्रक्रिया गतिमान है।
- मदन मोहन जोशी, एई सिंचाई विभाग।