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महंगे दामों में रेता मंगाने को मजबूर ग्रामीण, निर्माण एजेंसिया

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गरुड़ (बागेश्वर)। स्थानीय नदियों में खनन पटटा स्वीकृत नहीं होने से निर्माण कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। विकास कार्यों और घरेलू निर्माण कार्य के लिए ग्रामीण और निर्माण एजेंसियां हल्द्वानी आदि शहरों से महंगे दामों में रेता मंगाने को मजबूर है। स्थानीय नदी और नालों में रेता और पत्थर चुगान पर पाबंदी होने से ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम करने को प्रधानों ने हाथ खींच लिए है।
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गोमती और घांघली नदी में दो साल से खनन बंद है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने खनन पट्टा स्वीकृत करने के की कई बार शासन और क्षेत्रीय विधायक से मांग की है। ग्रामीणों की जायज मांग को शासन प्रशासन द्वारा आज तक गंभीरता से नहीं लेने से ग्राम प्रधान और निर्माण एजेंसियां दो सौ रुपये बैग हल्द्वानी आदि शहरों से रेता मंगाने को मजबूर है। स्थानीय स्तर पर रेता, पत्थर के पट्टे स्वीकृत नहीं होने से ग्राम प्रधानों ने मनरेगा के निर्माण कार्य करने से हाथ खींच लिए हैं।

ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष नवीन ममगई, कनिष्ठ प्रमुख प्रकाश कोहली, मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत सिंह भंडारी, साधन सहकारी समिति डंगोली के अध्यक्ष दिगंबर नाथ गोस्वामी, छटिया स्टेट के प्रधान हरीश सिंह, बिमोला के प्रधान हरी राम भेंटा के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जर्नाजन लोहुमी ने सीएम से गरुड़ और घांघली नदी में खनन पट्टा स्वीकृत करने की मांग की है।
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