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राज्यपाल के हाथों डिग्री न मिलने से निराश लौटे डी.लिट धारक

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नैनीताल। कुमाऊं विवि के 15 वें दीक्षांत समारोह में ऐसा पहली बार हुआ कि शोध की सर्वोच्च उपाधि कही जाने वाली डीलिट की डिग्री कुलाधिपति की ओर से उपाधि धारकों को मंच पर बुलाकर न दी गई हो। विवि में हुई ऐसी व्यवस्था से उपाधि धारक काफी नाराज थे। वे डिग्री मिलने के बाद भी मायूस होकर लौटे।
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कुमाऊं विवि की ओर से दीक्षांत समारोह में पांच डीलिट धारकों को उपाधि दी जानी थी लेकिन सिर्फ चार लोगों ने ही नामांकन करवाया। दीक्षांत में शामिल होने के लिए तीन उपाधि धारक अलग-अलग राज्यों से आए थे। उनका कहना था कि डीलिट जैसी बड़ी उपाधि को सभी विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति की ओर से दी जाती है। जब वे बुधवार को समारोह स्थल पर पहुंचे तो वहां पता चला कि इस बार मंच से उपाधि नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था सही नहीं है।

डीलिट उपाधि धारकों से वार्ता -
- हिंदी में डीलिट की उपाधि प्राप्त करने वाले डॉ. ओम प्रकाश, कैथल हरियाणा के रहने वाले हैं और कुरुक्षेत्र विवि से संबद्ध आरकेएसपी पीजी कॉलेज में प्राध्यापक हैं। उन्होंने स्वतंत्रोत्तर हिंदी कहानी और उत्तर आधुनिकतावाद विषय पर शोध कार्य पूरा किया। उन्होंने उत्तराखंड एक हिन्दी भाषी प्रदेश होने के कारण शोध कार्य के लिए कुमाऊं विवि को चुना।
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- पंचकुला विवि के संस्कृत विभाग में तैनात डॉ. शिव कुमार शास्त्री ने कुमाऊं विवि से 20वीं शताब्दी के संस्कृत काव्यों में राष्ट्रीय वेदान एक अध्ययन विषय पर डीलिट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 2003 में पंचकुला से पीएचडी की डिग्री ली। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंग्रेजी का काफी बोलबाला है लेकिन सभी संस्कारों की शिक्षा संस्कृत से मिलती है।

- देवभूमि के सांस्कृतिक परिदृश्य के बीच नागपुर, महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत डॉ. प्रज्ञा शरद देशपांडे ने कुमाऊं विवि से संस्कृत में डीलिट की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध कार्य का विषय श्रीमद्भागवत गीता में प्रतिपादित मधुमति विद्या: एक समीक्षात्मक अनुशीलन (सच्चिदानंद मोहपा संप्रदाय) के विषय में पूरा किया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में काफी रुचि है और उत्तराखंड के लोगों ने शोध कार्यों के दौरान काफी सहयोग किया।

- वर्तमान में जीपीजीसी चंपावत में तैनात डॉ.सीडी सूंठा ने कुमाऊं विवि से वाणिज्य में डीलिट की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विज्ञान संबंध बैंक संबद्धता रहा। डॉ. सूंठा ने 1988 में वाणिज्यिक बैंक वित्त विषय में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की थी।
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