नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग, आईपीएसडीआर और हिमालयन एजुकेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से दो दिनी कार्यशाला आयोजित की गई। इसका विषय हिमालयन क्षेत्र से पलायन चुनौतियां और समाधान था।
एचआरडीसी सभागार में आयोजित समापन सत्र में प्रो. टीडी जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या में काफी इजाफा हो रहा है और ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी बनती है कि समस्याओं पर शोध करें। साथ ही नीति नियंताओं, सरकारों को सुझाव दें, जिससे क्षेत्र का विकास हो सके। प्रो. अतुल जोशी ने कहा कि गांव से शहरों की ओर पलायन होना एक स्वभाविक प्रक्रिया है लेकिन उत्तराखंड के गांवों से जिस प्रकार पलायन हुआ है वो ठीक संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को हिमालय क्षेत्रों के विकास पर जोर देने के साथ ही वित्तीय रूप से भी सक्षम बनाना होगा। वहीं अन्य वक्ताओं ने कहा कि हिमालयी राज्यों में रह रहे लोगों के प्रति संवेदनशील होना होगा और हिमालय वासियों के सतत जीवन और जीविका की सुरक्षा करनी होगी। साथ ही कार्यशाला के छह तकनीकी सत्रों में हिमालय क्षेत्रों की भौतिक, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक आयामों की चर्चा की गई। उक्त बिंदुओं पर आधारित 75 शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए। वहीं एमबीए ग्रामीण प्रबंधन के विद्यार्थियों की ओर से 28 गांवों पर तैयार की गई रिर्पोट भी पेश की गई।
ये रहे मौजूद
प्रो. बीडी कविदयाल, प्रो. एलएस बिष्ट, प्रो. अनिल जोशी, डॉ. एमसी पांडे, डॉ. एएस उनियाल, डॉ. कमल जोशी, प्रो. एमएम जिन्नाह, डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. सारिका जोशी, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. जीवन उपाध्याय, डॉ. अब्दुल सामीर, डॉ. अब्दुल सकीर, डॉ. मनप्रीत सिंह, डॉ. गगनप्रीत सिंह, डॉ. चमन कुमार, डॉ. वैशाली बिष्ट, डॉ. विजय, डॉ. मनोज पांडे, डॉ. ललित पंत, डॉ. विनोद जोशी, डॉ. आस्था अधिकारी, डॉ. श्रद्धा शर्मा आदि थे।