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श्रमजीवी पत्रकारों को आंध्रप्रदेश, उडीसा आदि की तरह ही सुविधाएं दें: हाईकोर्ट

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court - फोटो : PTI
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को श्रमजीवी पत्रकारों को आंध्रप्रदेश, ओडिसा आदि की तरह ही सुविधाएं देने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया है। कोर्ट ने कहा कि पत्रकारों को दी जा रही पांच हजार रुपये प्रतिमाह की पेंशन में बढ़ोतरी करें।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी रविंद्र देवलियाल ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि नियमित रूप से नियुक्त संवाददाता और अनियमित रूप से नियुक्त संवाददाता आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई जांच समितियों के सुझाव के बावजूद उन्हें मिलने वाला वेतन बहुत कम है। याचिका में कहा कि पत्रकारों का समाज में बहुत बड़ा योगदान है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से प्रार्थना की थी कि श्रम और रोजगार मंत्रालय, राज्य सरकार व अन्य को निर्देश जारी किए जाएं कि संवाददाताओं की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को पूरा किया जाए। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पत्रकारों के लिए विभिन्न योजनाएं लागू हैं और इसके लिए पांच करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पत्रकार की हादसे में मौत या शारीरिक नुकसान होने पर सरकार पांच लाख रुपये और विशेष परिस्थितियों पर दस लाख रुपये देती है। उन्होंने कहा कि साठ वर्ष से अधिक सात पत्रकारों को इसी मद से वृद्ध पेंशन दी जा रही है। पत्रकारों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए 25 लाख रुपये का बजट रखा गया है। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जाती है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को आदेशित किया है कि वो द वर्किंग जर्नलिस्ट एंड न्यूज पेपर एम्प्लॉइज एक्ट 1955 के तहत पत्रकारों के श्रम कानून को लागू कराएं। न्यायालय ने कहा कि सेक्शन 9 के तहत केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर एक वेज बोर्ड बनाए। कोर्ट ने कहा कि 11 नवंबर 2011 की अधिसूचना के तहत पत्रकारों की स्थिति में सुधार लाएं। राज्य सरकार को आदेशित किया है कि वो वृद्ध पत्रकारों की पेंशन को खर्चों के अनुरूप बढ़ाएं। कोर्ट ने सरकार को कहा कि वो आंध्रप्रदेश और ओडिसा की तर्ज पर पत्रकारों के लिए वेलफेयर फंड नियमावली बनाएं। कोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा कि राज्य सरकार के अपर मुख्य सचिव और निदेशक सूचना पत्रकारों के स्वास्थ्य और पेंशन स्कीम बनाकर इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर अलग मद बनाएं। सरकार को कहा है कि वो चाहे तो पत्रकारों को हाउसिंग फ्लैट्स स्कीम या सरकारी आवासीय योजनाओं में आरक्षण दे सकती है।
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