नैनीताल। रईस होटल क्षेत्र से विस्थापित हुए परिवारों की दिवाली पर आपदा का ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। विस्थापित 13 परिवार दो माह बाद भी विस्थापन के दंश से मुक्त नहीं हो पाए हैं। जीआईसी, जीजीआईसी और जूनियर विद्यालय में विस्थापित किए गए परिवारों के बच्चे दिवाली की खुशियां मनाने को उतावले हैं और आपदा के दर्द से माता-पिता की आंखें नम हैं। अब ये कहां और कैसे दिवाली मनाएं, इसी को लेकर चिंतित है। क्योंकि इनका घर तो आपदा की भेंट चढ़ गया।
लगभग ढाई माह पहले रईस होटल क्षेत्र में बारिश के चलते भूस्खलन शुरू हुआ था। उस समय यहां 24 से अधिक परिवार रह रहे थे। भूस्खलन से सभी मकानों के बलिया नाले में समाने का खतरा बढ़ा तो प्रशासन ने मकान खाली करवा कर इन लोगों को जीआईसी, जीजीआईसी और जूनियर विद्यालय में शिफ्ट करा दिया था। अब लगभग दो माह से यह लोग विस्थापित होने का दर्द झेल रहे हैं।
अब दीपावली नजदीक है, लेकिन यह दिवाली कैसे मनाएंगे और कहां मनाएं यह एक बड़ा सवाल इनके सामने खड़ा हो गया है। इनके पास दिवाली मनाने के लिए घर ही नहीं है। स्कूल के एक कमरे में कई-कई परिवार रह रहे हैं। दीपावली पर सभी लोग अपने घरों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करेंगे। लेकिन इनके सामने दिवाली मनाने के लिए खुद का घर भी नहीं है।
रईस होटल क्षेत्र में भूस्खलन के चलते विस्थापित हैं 13 परिवार
अनहोनी की आशंका से खुद का घर छोड़ तीन स्कूलों में रह रहे हैं लोग
दिवाली को लेकर बच्चों में खुशी का माहौल
विस्थापित हुए परिवारों में सात से ज्यादा बच्चे हैं। दिवाली पास आ चुकी है यह जानकर सभी बच्चे त्योहार की खुशियां बांटने के लिए उतावले हो रहे हैं। बच्चे पटाखे, मिठाई और रोशनी की कल्पनाओं में खोए हुए हैं और माता-पिता यह सोच कर परेशान हैं कि वह दिवाली मनाएं तो आखिर मनाएं कैसे?
इनके घर चढ़े आपदा की भेंट
जीआईसी में अभिनव आर्या, श्याम, किशोर, करन कश्यप, शुभम, सुमित का परिवार विस्थापित किया गया है, जबकि जूनियर स्कूल में उमेश कुमार, दीप प्रकाश, संजीव कुमार, मिथुन कुमार का परिवार विस्थापित किया गया है। इसी तरह जीजीआईसी में अमित, ललित प्रसाद, बाबू लाल का परिवार विस्थापित किया गया है।