रामनगर (नैनीताल)। यहां नगरपालिका ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय कुमाऊंनी-गढ़वाली भाषा सम्मेलन का समापन कवि सम्मेलन के साथ हुआ। शनिवार के कार्यक्रमों का शुभारंभ साहित्य अकादमी दिल्ली के भाषा सम्मान से पुरस्कृत कुमाऊंनी कवि मथुरा दत्त मठपाल ने किया। इसमें वक्ताओं ने भाषा की अस्मिता से जुड़ाव, भाषा के मानकीकरण के प्रयासों पर विचार व्यक्त किए। कहा कि मानकीकरण के लिए संबंधित भाषा में बोलना, लिखना, पढ़ना भी जरूरी है। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें जगदीश चंद्र जोशी ने ‘म्यर मोहनी घर ऐरौ’ शीर्षक की मार्मिक कविता पढ़ी। इसके माध्यम से एक शहीद के पार्थिव शरीर के तिरंगे में लिपटे शव पर मां की प्रतिक्रिया दी। धर्मेंद्र नेगी ने गढ़वाली कविता ‘पकया चखुलू तो भी’ पढ़ी। इस दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र ध्यानी, डॉ. योगंबर बर्तवाल, भोर सोसायटी से जुड़े संजय रिखाड़ी, जुगल किशोर, नवेंदु मठपाल, नवीन तिवाड़ी, पीसी जोशी, अजेंद्र सुंदरियाल, अमित तिवाड़ी, नंद राम आदि थे।