नैनीताल। बलिया नाले में भूस्खलन की प्रमुख वजह बनी जलधारा को लेकर असमंजस की स्थिति अब तक बनी हुई है। तीन दौर की जांच हो चुकी है। देहरादून तक की टीमें जांच कर चुकी हैं, लेकिन यह पता नहीं चल सका है जलधारा में पानी कहां से आ रहा है।
बलिया नाला इस समय नगर की बड़ी परेशानियों में से एक है। यहां तीन महीने से हो रहे भूस्खलन के कारण अब तक 10 से ज्यादा घर खाली कराए जा चुके हैं। 30 से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया जा चुका है। 200 मीटर की लंबाई में हो रहा भूस्खलन आए दिन जगह को निगलता जा रहा है। कृष्णापुर को जाने वाली सड़क टूट चुकी है। लोग अभी तक विस्थापित शिविरों में रह रहे हैं। तीन महीने का लंबा समय बीतने के बाद भी सिर्फ जांचें ही हो रहीं हैं। अभी तक नाले में कोई काम होता दिखाई नहीं देता। जबकि भूस्खलन अब भी जारी है। जायका की टीम ने डीएम विनोद कुमार सुमन के निर्देश पर सबसे पहले यहां जांच की थी। दो दौर की जांच में टीम ने पाया कि भूस्खलन का एक बड़ा कारण नाले में बह रही जलधारा है। इस जलधारा को बंद करने की जरूरत बताई गई। इसके बाद शासन से पहुंची टीम ने यहां जांच की। तीन दौर की जांच के बाद भी स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर यह पानी कहां से आ रहा है। हालांकि 13 सितंबर को बलिया नाले के निरीक्षण के बाद टीसीपी के चीफ इंजीनियर जय कुमार शर्मा ने कहा कि बलिया नाले में हो रहे भूस्खलन का एक प्रमुख कारण इसके नीचे से बह रही जलधारा है। नाले की मिट्टी मुलायम है। ऐसे में यह पानी के बहाव में कट जाती है और भूस्खलन का कारण बनती है।
बलिया नाले के नीचे बह रही जलधारा बन रही भूस्खलन का मुख्य कारण
200 मीटर की लंबाई में हो रहा है भूस्खलन, सड़क भी टूट गई है
झील के पानी से नहीं हुआ मिलान
बलिया नाले के पास रहने वाले लोगों का कहना था कि बलिया नाले में बह रही जलधारा नैनी झील के पानी से निकलती है। ऐसे में सिंचाई विभाग ने नैनी झील के पानी और बलिया नाले में बह रही जलधारा के पानी का नमूना लेकर जांच कराई। जांच में दोनों जगह का पानी अलग निकला। दोनों नमूनों का पानी मेल नहीं खाया। जांच से स्पष्ट हुआ कि यह पानी नैनी झील का नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पानी किसी स्रोत का हो सकता है, लेकिन जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आखिर यह पानी कहां से आएगा।
बलिया नाले में बह रही जलधारा के बारे में सिंचाई विभाग को जानकारी है। यह पानी नैनी झील का नहीं है, इसकी पुष्टि पानी के नमूनों से हो चुकी है। यह पानी कहां से आ रहा है इसका पता लगाया जा रहा है।
-मदन मोहन जोशी, एई सिंचाई विभाग