सितारगंज में बैगुल जलाशय किनारे राजस्व भूमि पर छह दशक से बसे गोठा गांव के परिवारों ने मालिकाना हक दिए जाने की मांग की है। बृहस्पतिवार को एसडीएम निर्मला बिष्ट को दिए मांग पत्र में ग्रामीणों ने कहा कि बैगुल जलाशय के निर्माण को 5526 एकड़ वन भूमि एवं 1126 एकड़ राजस्व भूमि अधिग्रहीत की गई थी। इसमें से 196.770 एकड़ जमीन राजस्व गांव गोठा की थी।
ग्रामीणों का कहना था कि अधिग्रहीत राजस्व भूमि पर ही छह दशक से एससी और ओबीसी के भूमिहीन कृषक परिवार रह रहे हैं। इनकी भूमि नदी, बंजर व दीगर दरख्तान के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। वर्ग आठ के काश्तकार अब्दुल रहमान के नाम दर्ज 288 बीघा भूमि को भी जलाशय निर्माण के दौरान राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया गया। वर्ष 1964 से 1975 तक यह भूमि सिंचाई विभाग के स्वामित्व व प्रबंधन में रही। इसी बीच किसानों को कृषि कार्य के लिए पट्टे भी आवंटित कर दिए गए। वर्ष 1975 के बाद उनके कब्जे की भूमि वन विभाग को सौंपने का अर्द्धशासकीय पत्र जारी हुआ। छह माह बाद नवंबर 1975 में आठ नवंबर 1973 से पहले के बसे परिवारों पर भूमि नियमितीकरण व पट्टे मिलने का शासनादेश जारी हो गया, जिससे उन्हें हटाने का आदेश समाप्त हो गया। 25 जुलाई 1976 को जलाशय की हस्तांतरित निष्प्रयोज्य 1810.36 एकड़ भूमि का सीमांकन कर वन विभाग को सौंप दी गई थी। फिर भी वन विभाग आज तक सिंचाई विभाग से भूमि हस्तांतरण न होने का बहाना बनाकर उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया को टाल रहा है। उन्होंने मालिकाना हक देने के लिए संबंधित विभागों से जांच आख्या मांग शासन स्तर पर उचित नीति निर्धारण कर मालिक हक दिलाने की मांग की। वहां पूर्व बीडीसी योगेंद्र यादव, वनाधिकार समिति के अध्यक्ष श्याम सुंदर, घनश्याम, राजेंद्र, बहादुर, आकाश यादव, हरी लाल, सुरेंद्र प्रसाद आदि थे।