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नहीं बन पाया सपनों का उतराखंड

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उत्तराखंड आंदोलनकारी - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी/नैनीताल/रामनगर। मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा कांड की 24वीं बरसी पर राज्य आंदोलनकारी समाज संगठन ने राज्य के लिए शहीद होने वाले बलिदानियों को याद किया।
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हल्द्वानी में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के 18 साल बाद भी उत्तराखंड शहीदों के सपनों का राज्य नहीं बन सका है। प्रमुख राज्य आंदोलनकारी केदार पलड़िया ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के वास्तविक आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण मांगा। उन्होंने शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग की। राज्य अनदेखी पर आंदोलन की चेतावनी दी। इस दौरान हुकुम सिंह कुंवर, राजेंद्र खनवाल, राजकुमार केसरवानी, अनिल खंडेलवाल, मुकेश बेलवाल, संतोष गौड़, हरेंद्र क्वीरा, डॉ. भुवन तिवारी, बसंत मिश्रा, ललित जोशी आदि थे। नैनीताल में राज्य आंदोलनकारियों ने तल्लीताल गांधी मूर्ति के पास धरना दिया। सभा में पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि राज्य का संतुलित विकास नहीं हो सका है। धरने में पूर्व विधायक सरिता आर्या, निवर्तमान पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण, कैलाश जोशी, पूरन मेहरा, डॉ. सरस्वती खेतवाल, जेसी उप्रेती, कुलदीप सिंह, भारती जोशी आदि थे। रामनगर के आंदोलनकारियों ने रामपुर तिराहा कांड की 24वीं बरसी पर धिक्कार दिवस मनाया। शहीद पार्क लखनपुर में श्रद्धांजलि सभा हुई। वहां उपपा नेता प्रभात ध्यानी, हरिमोहन, पान सिंह नेगी, योगेश सती, नवीन नैनवाल, ललिता रावत, सरस्वती जोशी, मेघा, हरीश जोशी, चंदू लाल मैंदोलिया, मदन मेहता, हाजी रईस अहमद, फजल खान, योगेश सती, सुनील, पंकज, गोविंद आदि थे।
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