नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण की जांच करने के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के कानूनों का सख्ती से पालन करने को कहा है। हरिद्वार निवासी राजेश वर्मा की याचिका पर मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह कानून का सख्ती से पालन करने के लिये उचित प्राधिकरण और सलाहकार समितियों का गठन करे। कोर्ट ने राज्य सरकार को कानून का विनियमन करने के लिये तीन माह के अंदर राजपत्र प्रकाशित करने को कहा है।
राजेश वर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिये कानून बनाया गया है। इस कानून का अनुपालन सख्ती से नहीं किया जा रहा है और लिंग की जांच प्रसव से पूर्व ही कर ली जा रही है। इस कारण भ्रूण हत्याओं को बढ़ावा मिल रहा है। केंद्र और राज्य सरकार कानून का पालन नहीं करवा रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिये नैदानिक तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है। ऐसे मामलों के उल्लंघन के लिये कानून में सजा का प्रावधान है।
प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण की जांच को बने कानून का पालन सख्ती से हो