नैनीताल। 11 दिन बीतने के बाद शासन से भेजी गई भूवैज्ञानिकों की टीम ने बुधवार को टूटी लोअर माल रोड समेत तमाम स्थानों का निरीक्षण किया। टीम ने कई सालों के बारिश, झील के जलस्तर, भूधंसाव और रोड के चटकने संबंधी आंकड़े इकट्ठे किए। टीम टूटे रोड पर प्रयोग की गई सामग्री की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। इसके बाद शासन इस पर कोई फैसला लेगा।
बुधवार सुबह दस बजे देहरादून से आपदा प्रबंधन व न्यूनीकरण केन्द्र के अधिशासी निदेशक डा. पीयूष रौतेला की अगुवाई में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेफिंग देहरादून के भूवैज्ञानिक डा. हर्ष बानखेड़ा, रुड़की सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के देवी प्रसाद, आईआईएसआर के सोहन राज, बाडिया इंस्टीट्यूट के विक्रम गुप्ता टूटे माल रोड का निरीक्षण करने पहुंचे। टीम ने नैैनी झील व राजपुरा पहाड़ी का भी निरीक्षण किया। बीते सालों के बारिश, नैनी झील के जलस्तर और दरारें आने के आंकड़े इकट्ठे किए। टीम के सदस्य पूरे दिन इन आंकड़ों को लेकर मंथन करते रहे और माल रोड को बचाने पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान एडीएम बीएल फिरमाल, सिंचाई विभाग के ईई हरीश चंद सिंह, जिला आपदा अधिकारी शैलेष कुमार, एई मदन मोहन जोशी, नीरज जोशी, आरसी पंत, एएसपी हरीश चंद्र सती, तहसीलदार कृष्ण राम, लोनिवि के एई एमपीएस कालाकोटी आदि टीम के साथ रहे।
माल रोड और झील को लंबे समय तक बचाने पर किया विचार विमर्श
जांच पूरी कर शासन को सौंपेंगे रिपोर्ट, फिर शासन लेगा कोई फैसला
बारिश, जलस्तर, भूधंसाव और रोड के चटकने संबंधी आंकड़े इकट्ठा किए
भूगर्भीय हलचल हो रही
यूजीसी के भूवैज्ञानिक डा. बहादुर सिंह कोटलिया का कहना है कि जिस स्थान पर माल रोड ध्वस्त हो रही है वहां भूगर्भीय हलचल हो रही है। इस स्थान से डीएसबी फाल्ट भी गुजर रहा है। वाहनों के कंपन से सुरक्षा दीवारें लगातार कमजोर हो रही हैं।