नैनीताल। हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को उत्तराखंड के प्रत्येक उद्योग की जल, वायु, ठोस अपशिष्ट और पर्यावरण से संबंधित मानकों के पालन के आकलन की रिपोर्ट छह सप्ताह में कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ के सामने शुक्रवार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकुर कंसल व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। पीठ ने कहा कि कोर्ट के सामने रखे गए रिकॉर्ड से यह जाहिर हो रहा है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में शायद ही किसी उद्योग का 1986 के पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत जांच की हो। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि पर्याप्त संसाधन न होने के कारण बोर्ड ऐसा नहीं कर पा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि यह उनकी समझ से परे हैं कि एक्ट के तहत गठित संस्था किस तरह से एक्ट के प्रावधान का पालन नहीं करवा पा रही है। पर्यावरण की कीमत पर विकास को इजाजत नहीं दी जा सकती है।
ऊधमसिंह नगर निवासी हिमांशु चंदोला की याचिका में पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नया पक्षकार बनाया और बोर्ड को छह सप्ताह के अंदर सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि जांच इस बात पर की जाए कि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 और 1981, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम और 1986 के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के मानकों का पालन उद्योग कर रहे हैं या नहीं। पीठ ने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद ही अन्य आदेश पारित किए जाएंगे। याची का कहना था कि प्रदेश में उद्योग प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने सीपीसीबी को दिए रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के मानकों के पालन की होगी जांच