नैनीताल। 27 जुलाई को ग्रहण के दौरान इस सदी के सबसे लंबे ब्लड मून का संयोग है लेकिन इस ग्रहण को भी बादलों का ग्रहण लगने की संभावना से वैज्ञानिक आशंकित हैं। समूचे यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका से नजर आने वाले इस ब्लड मून की अवधि एक घंटा 43 मिनट है लेकिन इसके पहले और बाद के आंशिक ग्रहण को जोड़ लें तो यह अवधि चार घंटे छह मिनट की होगी।
भारत में यह ग्रहण रात्रि 11 बजकर 43 मिनट पर आंशिक रूप में नजर आएगा और एक बजे से दो बजकर 43 मिनट तक पूर्ण ग्रहण होगा। उसके बाद तीन बजकर 49 मिनट तक पुन: आंशिक ग्रहण होगा। चंद्रमा 27 जुलाई को पेरिग्री यानी पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होगा। इस कारण आकार में छोटा लगने के कारण लंबे समय तक पृथ्वी की छाया में रहेगा। ग्रहण की अवधि सामान्य से 40 फीसदी ज्यादा होगी। पूर्ण ग्रहण के दौरान चांद नारंगी रंग का नजर आएगा। आर्य भट्ट प्रेक्षण एवं शोध संस्थान, एरीज के निदेशक डा. अनिल पांडे के अनुसार मानसून के चलते आकाश में बादल छाए रहने के कारण इसका दीदार होने को लेकर आशंका है। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान आकाश में अधिकांश समय बादल होने के चलते इन दिनों एरीज के टेलीस्कोप बंद कर दिए गए हैं और इस ग्रहण का कोई प्रेक्षण व अध्ययन एरीज से नहीं किया जाएगा।
चार घंटे से अधिक का होगा कुल ग्रहण
एक घंटे 43 मिनट तक नारंगी नजर आएगा चांद
एरीज से नहीं होगा चंद्र ग्रहण का अध्ययन
इस कारण दिखेगा चांद नारंगी
नैनीताल। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान विपरीत दिशा के कारण चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश नहीं पड़ेगा बल्कि धरती का प्रकाश ही परावर्तित होकर वापस आएगा। वायुमंडल से कम वेव लेंथ की हर व नीले प्रकाश की किरणें अपवर्तन से इधर उधर छिटक जाएंगी और केवल लाल पीला प्रकाश धरती तक पहुंचेगा जो नारंगी नजर आएगा। बता दें कि गत 31 जनवरी को चांद पृथ्वी के बहुत नजदीक था और एक ही महीने में दो पूर्णिमा पड़ी थीं इन संयोगों के कारण उसे सुपर (बड़ा), ब्लू (दो पूर्णिमा वाला), ब्लड मून नाम मिला था, जबकि 27 जुलाई को केवल ब्लड मून ही नजर आएगा। इन दिनों चांद पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर है।